शनिवार, 25 सितंबर 2010

पूर्णिमा: बेटियाँ

पूर्णिमा: बेटियाँ

2 टिप्‍पणियां:

  1. पूर्णिमा जी की सधी हुई लेखनी से निकली काव्य धारा सरल,साफ़ और अत्यंत प्रभावी है. कोमल विषय,मन-मोहक शैली और गागर में सागर भरने की कला ......सब कुछ .........नवनीत के स्वाद सा अनुभव.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेटियां कविता बहुत अच्छी लगी ...पूर्णिमा जी के ब्लॉग पर टिप्पणी करने का ऑप्शन भी लगवा दें ...

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.