मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

आत्महत्या क्यों करली ?

कैसे समझ लिया तुमने .......
कि पतझड़ के पश्चात 
थम जाती है ऋतुओं की गति 
और नहीं है यह ....वसंत के आगमन की पूर्व तैयारी !
कैसे समझ लिया तुमने .....
कि गिरने के बाद .......फिर उठ नहीं सकता कोई 
और नहीं उगेगा सूरज....डूबने के बाद फिर कभी.
कुछ टूटने के साथ ....ख़त्म नहीं हो जाता सब कुछ
जुड़ता रहता है .....कहीं और भी कुछ .
इसमें भी छिपा है जीवन का मधुर संगीत ....
ज़रा ठहर कर .....सुनो तो सही. 
प्रकृति का सन्देश ......गुनो तो सही.

इधर देखो....ध्यान से सुनो......कितनी खूबसूरत है दुनिया  ...
नदियों की कल-कल, 
फूलों की मुस्कान पर .......पत्तों की हलचल 
हरे-भरे पर्वतों का गौरव,
चिड़ियों का कलरव,
वर्षा की सरगम,
सूरज का तीखापन ....
..................................
सोचो तो सजा है ....जी लो तो मज़ा है.
और ज़रा ...................इनको तो देखो....
पैबंद लगे कपडे हैं ....दूर सभी झगड़े हैं 
मेहनत की रोटी है....चोरी की खोटी है .
पेड़ की छाँव में भर नींद सोना 
अरे ! होकर अकिंचन
तुम भी बटोर लेते ......पूरी धरती का सोना........
आत्महत्या क्यों कर ली ?  

अमृत की अभिलाषा का अंत ...है उसे पा लेना 
विष कैसे हाथ लगा ?
वह तो तुम्हारे लक्ष्य में कहीं था ही नहीं 
लक्ष्य में कहीं कोई भूल तो हुयी नहीं. 
विष ही पीना था तो शिव बन जाते 
अमृत की अभिलाषा थी तो देव बन जाते.... 
राहु क्यों बने ?
उसे तो जीवन नहीं मिला .......अमृत पीकर भी 
और मृत्यु नहीं मिली ........सुदर्शन से कट कर भी.
सब कुछ तो उपलब्ध है यहाँ ...
विष भी ...............और अमृत भी 
तुम्हें तो बस ...........तय भर कर लेना है अपना प्राप्य 
ज़ो निश्चित ही अमृत है ....और केवल अमृत ही  
विष तो कदापि नहीं .....विष तो कदापि नहीं. 

8 टिप्‍पणियां:

  1. विष ही पीना था तो शिव बन जाते
    अमृत की अभिलाषा थी तो देव बन जाते....
    राहु क्यों बने ?
    उसे तो जीवन नहीं मिला .......अमृत पीकर भी
    और मृत्यु नहीं मिली ........सुदर्शन से कट कर भी.
    सब कुछ तो उपलब्ध है यहाँ ...
    विष भी और अमृत भी
    तुम्हें तो बस ...तय भर कर लेना है अपना प्राप्य

    hmmmmmmmm.............
    aapki ye rchnaaa.jaane kitne dilon ko shaanti degi....kuch dil kitnaaa skoon mehsus krnege ise pr ke...........
    तुम्हें तो बस ...तय भर कर लेना है अपना प्राप्य
    aaj ke yuwaaon tak kaash ye rchnaa pahuch jaaye...
    aur khaas kr ye line...........
    bahut bahut shurkiyaa...aisa kuch likne ke liye aur hum sab se share krne ke liye.......:)
    take care

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  2. अनपेक्षित परीक्षा परिणामों से या कभी-कभी केवल पूर्वानुमान लगाकर ही कुछ छात्र-छात्राएं जीवन समाप्त कर लेने का निर्णय लेलेते हैं ...ऐसी ही दुखद घटनाओं से प्रेरित होकर यह लिखना पड़ा, यदि आप इसे अपने विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए उपलब्ध करा सकें तो शायद कुछ सार्थकता हो

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  3. आशा का संचार करती एक बेहतरीन एवं सार्थक रचना के लिए आभार। निश्चय ही अपना प्रभाव छोड़ेगी पाठकों पर।

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  4. अमृत की अभिलाषा का अंत ...है उसे पा लेना
    xxxxxxxxxxxxxxxxx
    Kaushalendra ji
    नमस्कार जी
    जीवन की आशाओं से भरपूर कविता,आपकी बेहतरीन और सकारात्मक सोच को सामने लाती है ...शुक्रिया

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  5. kaushalendra ji.bbahut hi ghan prastuti ke saath sach ko abhivykt karti hai aapki post

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  6. आप सब की गुणग्राहकता को मेरा सादर नमन !

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.