सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

खुले में खज़ाना

यह विषय राहुल जी का है ...अतः आज मैं केवल मूर्तियों के चित्र ही प्रस्तुत कर रहा हूँ .......
इस टिप्पणी के साथ ...कि इनमें से कुछ मूर्तियाँ बिना किसी देख-रेख के बाहर पड़ी हैं.....
कुछ वर्ष पूर्व रायपुर में कुछ प्रतिष्ठित लोग मूर्ति तस्करी के आरोप में पकड़े गए थे ....बाद में अपराध प्रमाणित नहीं हो सका .....जबकि मूर्तियाँ उनकी कार में से ही बरामद की गयी थीं ...
शुक्र है कि मूर्तियाँ भगवान के भरोसे अभी तक सलामत हैं ........







ऊपर की तीनो मूर्तियाँ सड़क के किनारे एक ही स्थान पर रखी हुयी हैं......स्पष्टतः लोग उनकी पूजा करते हैं ...पर सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है









ये पांचो मूर्तियाँ गढ़िया पहाड़ के ऊपर के मंदिर में हैं और सुरक्षित हैं

 
 
 
नंदी के चित्रों से स्पष्ट है कि यह मूर्ति शहर से बाहर एक तालाब के किनारे रखी हुयी है ....सुबह शाम को छोड़कर यह स्थान प्रायः निर्जन ही रहता है......हाँ मद्य सेवी अवश्य कभी भी दिखाई पड़ सकते हैं.

3 टिप्‍पणियां:

  1. राहुल जी की प्रतीक्षा हम भी कर रहे हैं डाक्टर साहब।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऐसी सभी मूर्तियों को संरक्षित श्रेणी में रख देना चाहिए सरकार को मगर शायद हिंदुविरोधी सरकार से इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती..हाँ इनमें से कुछ मूर्तियाँ इटली के स्टोर में बिकती मिल जाये तो आश्चर्य नहीं होगा..

    उत्तर देंहटाएं
  3. विरासत की सुरक्षा की बहुत आवश्यकता है। यह जागृति फैलनी चाहिये और प्रशासन के विशाल मकड़जाल को भी हाथ पर हाथ रखना छोड़कर काम पर उतरना चाहिये।

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.