रविवार, 24 जून 2012

फूल खिले हैं जंगल-जंगल

वर्षा में जंगल का सौन्दर्य देखते ही बनता है। चलिये न! जरा घूम कर आते हैं  ...नहीं-नहीं, मैं आपको भारत के सबसे ख़ूबसूरत "जगदलपुर-वाल्टेयर" रेलमार्ग की ओर नहीं ले जा रहा, जो बरसात में और भी मनोहारी हो जाता है बल्कि अभी तो जंगल से होकर जाते रायपुर-बस्तर राजमार्ग के दोनो ओर अनुपम छटा और भीनी ख़ुश्बू बिखेरते कुटज के जंगल के दर्शन कराने ले चल रहा हूँ जहाँ वारिश के शुद्ध जल से स्नात कुटज के पेड़ श्वेत पुष्प गुच्छ थामे आपके स्वागत में प्रतीक्षारत हैं... 


यही है कुटज (Holerina antidysentrica)
जोकि डिसेंट्री यानी आँव-पेचिश की उत्कृष्ट औषधि है। इसके तने की छाल से बनती है डिसेंट्री की औषधि, इसकी लम्बी फली में लगने वाले यव के आकार के बीजों(इन्द्रयव) से बनती है मधुमेह की औषधि और इसकी जड़ की छाल के चूर्ण का क्षीरपाक लाभ करता है ट्युबर्क्युलोसिस में।
तो देखा आपने कितना उपयोगी है यह ख़ूबसरत वनौषधि।  

विल्व (Aegle marmilose)
मामला डिसेंट्री का हो तो विल्व फल के बिना मुक्ति नहीं मिलने वाली। डिसेंट्री की प्रसिद्ध औषधि "विल्वावलेह" के लिये तो आपको शिव प्रिय विल्व की शरण में जाना ही होगा। इसके कच्चे फ़लों के गूदे से बनता है विल्वावलेह। इसके पत्ते के स्वरस से बनती है मधुमेह की औषधि। यह विषघ्न भी है तभी तो शिव जी को अत्यंत प्रिय है विल्वपत्र।

गिलोय Tinospora cardifolia
ज्वर कैसा भी हो, साधारण, विषम या फिर टायफ़ाइड गिलोय के बिना काम नहीं चलने वाला। ज्वर के अतिरिक्त पेप्टिक अल्सर, अर्टीकेरिया, डर्मेटाइटिस आदि के लिये भी गिलोय प्रसिद्ध है तभी तो इसका नाम है "अमृता" । पेड़ पर चढ़ी इसकी लता का सम्बन्ध यदि जड़ से समाप्त कर भी दिया जाय तो शेष बची बेल से कुछ दिनों में लम्बी-लम्बी नयी जड़ें निकलकर मिट्टी से पुनः अपना सम्बन्ध स्थापित कर लेती हैं। काश! इंसान को भी अपनी मिट्टी से इतना ही प्रेम होता !

और ये रहे गिलोय के फल


पकने पर ये फल लाल और फिर सूखने पर गहरे कत्थई रंग के हो जाते हैं

पुनर्नवा (Boerhavia diffusa)
किडनी की व्याधियों की उत्तम औषधि इसके मूल से बनती है। गुर्दे की कई विकृतियों को दूर करने, रक्त को शुद्ध करने, रक्त का निर्माण करने और एडिमा की चिकित्सा के लिये पुनर्नवादि गुग्गुल, पुनर्नवादि मण्डूर और पुनर्नवारिष्ट के उपयोग से कौन अपरिचित है भला!

गगन विहारी
समय का सम्मान करना कोई इनसे सीखे। तभी तो इन्हें डॉक्टर्स के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं न!
चलिये, अब हम भी चलें अपने-अपने घर ...

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ...फूलों के सुंदर चित्र और उनके औषधिय गुण की सार्थक जानकारी ...

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  2. बढ़िया.....................बहुत बढ़िया...........

    अनु

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  3. बहुत खूब शानदार चित्र और जानकारी भरा पोस्ट

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  4. शानदार, सारगर्भित जानकारी युक्ता आलेख .. बधाई..

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  5. Aadarneey ,Tasveeron ki Vazah Se Aushdhiyon Ki pahchan Bhi sulabh hogai,Gyan Vardhak jankari Ke Liye Sadhuwad

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.