रविवार, 20 जनवरी 2013

मिथिला में छत्तीसगढ़ का पुरोहित्

अवसर था मिथिला में अयोध्यानरेश दशरथ के पुत्रों के स्वयम्वर का। विवाह के लिये पुरोहित की आवश्यकता हुयी तो राम की ननिहाल की ओर दृष्टि उठी। कांकेर के पर्वतों पर तपस्या करने वाले कंक ऋषि के सुझाव पर श्रृंगी ऋषि को पुरोहित के रूप में आमंत्रित किया जाना तय हुआ।  

 

कांकेर से लगभग चालीस किलोमीटर दूर उत्तर की ओर एक छोटा सा नगर है सिहावा। यह चित्र सिहावा की उस पर्वत श्रंखला का एक भाग है जहाँ श्रृंगी ऋषि तपस्या किया करते थे।  

कोहरे में छिपा कांकेर का गढ़िया पर्वत जो बस स्थानक से स्पष्ट दिखायी देता है। सुबह-सुबह सिहावा जाने के लिये बस की प्रतीक्षा में ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. और यह सृंगी ऋषि भगवान् राम की सहोदरा शांता के पति हैं-
    यानी राम के बहनोई
    सादर-

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  2. इस जानकारी के लिये धन्यवाद! यह दुर्भाग्य है कि राम की बहनों और अन्य भाइयों की पत्नियों और बच्चों के बारे में हम उतना नहीं जानते। आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस विषय पर एक आलेख अवश्य लिखने की कृपा करें।

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.