बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई झरना....
रविवार, 16 अगस्त 2026
गालीयुग मोहन मन भावय
शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
राजनीति
अतिविद्वान ने कहा
मत करो राजनीति की बातें
वातावरण दूषित होता है
मछलियों की बातें करो
तुम मछुआरे हो,
घंटियों की बातें करो
तुम पुजारी हो,
दूध की बातें करो
तुम ग्वाले हो।
कैसे करूँ
इन सबकी बातें
समझ नहीं पाता मैं।
मछलियों के बीज डाले ही नहीं गये
गाँव के सरकारी पोखर में
जो पहले से थीं भी
उन्हें खा गये
मंत्री जी।
पीतल की घंटियाँ
चुरा ली हैं
मंदिर के
सरकारी सेवकों ने
दूध नकली बनता है
नेता जी की फैक्ट्री में
कोई कोना नहीं
जो मुक्त हो
सरकारी हस्तक्षेप से।
सरकार माने राजनीति
राजनीति माने नेता जी की भैंस
भैंस नेता जी की ही है
क्योंकि लाठी उनकी ही है।
भैंस लेने के लिए रुपयों की नहीं
लाठी की आवश्यकता है
वह लोकोक्ति तो सुनी है न!
"जिसकी लाठी उसकी भैंस"
तो इस तरह सब कुछ
नेताओं का ही है
सरकार भी
राजनीति भी
देश भी
देश की सारी संपत्ति भी
और तुम कहते हो
अछूत है राजनीति
और राजनीति जो छू रही है सबको
उसका क्या!
केवल छू ही नहीं रही,
पकड़ कर मरोड़ दे रही है
कपड़े सा निचोड़ दे रही है
और तुम कहते हो
दूर रहो राजनीति से!
राजनीति को ही
दूर क्यों नहीं रखते
हम से
हमारे जीवन से
हमारे धर्म से
हमारे सुख-चैन से!
राजनीति
हर लेती है सब कुछ
हर किसी का
और हम
जाने दें उसे यूँ ही
बिना किये दंडित
बिना किये प्रक्षालित!
नहीं
हम निस्पृह नहीं रह सकते
तुम्हारी तरह अवसरवादी नहीं हो सकते।
रविवार, 9 अगस्त 2026
धुंधज्ञान
मठाधीश बनते ही काले अंग्रेज सर्वज्ञानी हो गये हैं । ज्ञान-विज्ञान-धर्म-अध्यात्म-नीति-विधान-न्याय-राजनीति-कला-पुरातत्व-इतिहास... सभी विषयों का एकछत्र मठाधीश हर काला अंग्रेज है । कोई भी विषय ऐसा नहीं जिसमें ये स्वयं को निष्णात न मानते हों । इनका ज्ञान अद्भुत है, धुंध से परिपूर्ण, स्पष्ट कुछ भी नहीं, आभासी भी नहीं, अदृश्य भी नहीं ।
काले अंग्रेजों का हठ है कि ब्रह्माण्ड की गतिविधियाँ
सुचारु रूप से चलाने के लिये धूम्रकेतु को सूर्य और सूर्य को धूम्रकेतु का पद एवं दायित्व
दिया जाना आवश्यक है । सूर्य! अब तुम्हें अपने दायित्व धूम्रकेतुओं को सौंप देने चाहिये
। ताम्रपत्रों पर लिख दिया गया है – “धूम्रकेतु को उसके नाम से पुकारा जाना अपराध माना
जायेगा, उन्हें कूड़ा-कचरा,
सड़ा हुआ, दुर्गंधित, और निरीह जैसे अर्थों को ज्ञापित करने वाले संबोधनों से ही संबोधित किया सकेगा
। यही न्याय है ।
ब्रह्माण्ड के सम्राट रहे धूम्रकेतु अनायास ही
तीन या पाँच हजार वर्ष पूर्व शोषित, वंचित और पीड़ित हो गये, उनकी
प्रजा में जो सूर्य थे उन्होंने अपने सम्राटों पर अमानवीय और अब्रह्माण्डीय अत्याचार
किये इसलिये अब सभी धूम्रकेतुओं को सूर्य बना देना होगा, धरती पर हमारा अवतार इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये
हुआ है । दबंग सूर्यों के लिये इस विधान का पालन करना ही प्रायश्चित है और यही दण्ड
भी ...दोनों एक साथ ।
काले अंग्रेजों ने शब्दों के नये अर्थ गढ़े,
नयी परिभाषायें लिखीं, नये विधान रचे ...और सिद्ध कर दिया कि वे सर्वशक्तिमान
हैं, वे ही परमपिता परमेश्वर और
इस ब्रह्माण्ड के रचयिता हैं । काले अंग्रेजों का दृढ़ विश्वास है कि ईश्वर एक काल्पनिक
शब्द है जिसका कोई अस्तित्व नहीं होता, जिसका अस्तित्व होता है वह वे स्वयं हैं इसलिये उनका बनाया विधान ही सनातन सत्य
है । उन्होंने नई-नई जातियाँ बनाकर जातियाँ समाप्त करने का बीड़ा उठाया ताकि जातियाँ
सदा के लिये बनी रहें । उन्होंने खर-पतवार के बीज बो कर खर-पतवार समाप्त करने का बीड़ा
उठाया ताकि खर-पतवार सदा अंकुरित, पुष्पित और पल्लवित होते रहें । उन्होंने यह ज्ञान भी दिया कि सूर्य तो इस ब्रह्माण्ड
के पिंड हैं ही नहीं, ब्रह्माण्ड
के बाहर से आकर धरती पर टपक पड़े इसीलिये इनका बहिष्कार करना फिर धीरे-धीरे इन सबका
समूल उच्छेद कर देना ही एकमात्र उपाय है ।
उद्घोषणा की जा चुकी है, संकल्प लिया जा चुका है ...कि अब काले अंग्रेज
रुकेंगे नहीं, धूम्रकेतुओं को सूर्य
के दायित्व सौंपने के लिये ब्रह्माण्ड के बाहर से आकर टपके सूर्यों का उन्मूलन हो जाने
तक उनके विविध अभियान चलते ही रहेंगे ।
अत्याचारी सूर्यो! तुम वापस जाओ, जहाँ से आकर टपके थे वहीं ...अखिल ब्रह्माण्ड
की सीमाओं से बाहर । यदि तुम ब्रह्माण्ड से बाहर नहीं गये तो हमारे धूम्रकेतु और ब्रह्माण्ड
के मूलपिण्ड एक साथ मिलकर तुम्हारी बेटियों को खींचते हुये ले जायेंगे... कहीं भी,
अपने घर... या झाड़ियों में... या किसी
खण्डहर में... फिर उनके साथ दुष्कर्म करेंगे और फिर उनकी हत्या कर देंगे । जो धूम्रकेतु
किसी सूर्य की ओर उँगली से संकेत कर देगा उसे लाखों चंद्रमा उपहार स्वरूप दिये जायेंगे,
वहीं सूर्य की आँखें फोड़ दी जायेंगी,
हाथ-पाँव काट दिये जायेंगे और जीवन भर
यूँ ही मरने के लिये छोड़ दिया जायेगा ।
...और काले अंग्रेजों को यह भी दृढ़ विश्वास है कि
धरती पर छायी धुंध पूरे ब्रह्माण्ड की धुंध है, सूर्य इस धुंध से कभी मुक्त नहीं हो सकेगा । सूर्य का
अंत निश्चित है । अब ब्रह्माण्ड में केवल धूम्रकेतुओं का ही साम्राज्य होगा।
सोमवार, 3 अगस्त 2026
अलोकतंत्र की ओर बढ़ता भारत
जब जनता से लेकर प्रधानमंत्री तक स्वार्थ में डूबे हुए हों, व्यक्तिगत और लोकजीवन से नैतिकता का तीव्रता से क्षरण हो जिसे रोकने के किसी भी स्तर पर कोई प्रयास ही न किए जाते हों और सत्ताधीशों में सत्ता पर अपनी स्थाई पकड़ बनाने के लिए समाज को विघटित किये जाने की उद्दाम इच्छा हो तब निश्चित ही लोकतंत्र के भीड़तंत्र में रूपांतरित होने की आशंकायें बलवती होती हैं। हम लोकतंत्र के स्वप्न के साथ छद्म लोकतंत्र को तांडव करते हुए देख रहे हैं।
हम चीन की कितनी भी आलोचना क्यों न कर लें पर उसके सामने झुकने के लिए विवश होते रहे हैं, यही सच है। भाजपा ने लोकतंत्र को लोहे के संदूक में बंद कर दिया है, शासक वर्ग में निरंकुशता और स्वेच्छाचारिता तो जनता में अराजकता और असहिष्णुता बढ़ती ही जा रही है।
यदि भारत में जातिवाद का अंत हो सके, आरक्षण समाप्त हो सके, प्रतिभा को अवसर मिलना सुनिश्चित हो सके, वैज्ञानिक सुरक्षित और निर्भय हो सकें, निर्बल का शोषण थम सके और हम चीन से होड़ करने की स्थिति में आ सकें.... तो हमें कम्युनिस्ट शासन भी स्वीकार है।
लोकतंत्र आपने आप में एक छल है। सच तो यह है कि शासित और शासक एक सामाजिक बाध्यता है। हर व्यक्ति आत्मनियंत्रण और नैतिक नहीं हो सकता इसलिए उस पर नियंत्रण आवश्यक है जो लोकतंत्र से कभी संभव नहीं। हमें एक सभ्य कुलीन तंत्र की आवश्यकता है, ....या फिर चीन की तरह अलोकतंत्र ...जो नियंत्रण भी करता है, वैज्ञानिक उन्नति भी करता है, व्यापार भी करता है, और आवश्यक होने पर सबको आँख भी दिखाता है।
रविवार, 2 अगस्त 2026
झमाझम वर्षा
अब की वारिश
झमाझम बरसीं
पोर्नगालियाँ
नरों के मुख से
उससे भी अधिक
नारियों के मुख से
महामानव धन्य हुये
देश धन्य हुआ
सभ्यता धन्य हुयी
संस्कृति धन्य हुयी
भीगकर
गालियों की बरसात में।
अन्याय भी धन्य हुआ
जानकर
कि क्षमा कर दिया है
नानबायोलाॅजिकल भगवान ने
सभी गालीबाजों को
और लग जाना चाहते हैं उन सबके गले
हँसते हुये
किंतु...
छोड़ देना चाहते हैं
गोलियाँ खाने के लिए
राष्ट्रप्रेम के सच्चे दीवानों को
स्वतंत्र कर देना चाहते हैं
असुरों को
मारने के लिए पत्थर
हर उस व्यक्ति को
जो करेगा देश की
सच्ची सेवा
और न्याय की माँग।
अब की वारिश
उमस
ताप देने लगी है
ज्वालामुखी के
बहते लावे की तरह।
शनिवार, 1 अगस्त 2026
मोरक्को की स्पेन में बलात् घुसपैठ
शुक्रवार, 31 जुलाई 2026
आरक्षण
मालिक अमित शाह ने बोला...
नानबायोलाॅजिकल मोदी ने बोला...
भगवान मोहन भागवत ने बोला...
भाजपा के सवर्णों ने बोला...
आरक्षण समाप्त नहीं होगा
...भले ही देश समाप्त हो जाए।
आठवले भी चढ़ गया
चने के झाड़ पर
चढ़-बढ़ कर गुर्राया
जो आरक्षण का विरोध करे
उसे देश से भगाओ।
तब पता चला
देश को मिल गया है
एक नया मालिक।
ए हो मर्दे
काहें के गुर्रा रहल बाड़ऽ
सबको पता है मालिक जी
आरक्षण अटल है
आरक्षण ही तो
चुनाव जीतने की संजीवनी है
लोकतंत्र का मंत्र है
प्रतिभापलायन का विधान है
लूटमार का रहस्य है
आरक्षण धर्म है
आरक्षण मर्म है
आरक्षण से ही
दुष्ट नेताओं की विजय है
जे जे जे जे जेएएएएएए आरक्षण।