निर्धन सदा सामाजिक दुर्बल
ऐश्वर्यशाली सदा सबल
सबल में प्रभुता
निर्बल में दीनता
यही है
लोकव्यवहार का कठोर धरातल
जो किसी आदर्श से
नहीं होता भयभीत
दिखाता है ठेंगा
हर युग के सुदामा को।
तुम
होकर भी सबल
करते रहे ईर्ष्या
और खोदते रहे खाइयाँ
अपने और सुदामा के बीच।
सुदामा बचता रहा
दूर भागता रहा
तुम्हारे अत्याचारों से
तुम्हारी परछाई से
तुमसे
तुमने इसे छुआछूत कहा
जातीय घृणा कहा
और फिर मढ़ दिया
एक और आरोप।
क्या सचमुच जातीय आरोप
या तुम्हारे अत्याचारों से बचने का
एकमात्र
विवश उपाय भर !