शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

चलो चलें गोवा के गाँवों की ओर ...

गोवा दुनिया भर के लोगों के लिये आकर्षण का केन्द्र है। वास्को रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद जहाँ लोग कंक्रीट के ज्ंगलों और समुद्र के बीचों की ओर भागते हैं मैंने सीधे गाँवों का रुख़ किया। नारियल, पूग( सुपारी), काजू, चीकू, केला और धान के खेतों का अपना अलग ही सम्मोहन है।

 

नारियल के बागान नहीं सपनों की दुनिया है ये


एग्रोफ़ॉरेस्ट्री

एग्रोफ़ॉरेस्ट्री का एक और ख़ूबसूरत नमूना

दूर-दूर तक फैले नारियल और सुपारी के बागान

किसी स्वर्ग से कम तो नहीं

गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा ...
मैं तो गया मारा...
आके यहाँ रे  !  आके यहाँ रे ....  

समुद्र की ओर जाने वाली मण्डोवी नदी पर एक पुल

पुराने गोवा का एक मोहल्ला जो कभी पुर्तगालियों का हुआ करता था।

पुराने गोवा में चर्च की ओर जाता एक ख़ूबसूरत पथ

पता नहीं क्या है यह, फल देखने में अच्छे लगे तो कैमरा मचल गया
मुझे कैमरे की बात माननी पड़ी।

क़रीब से देखिये, शायद आप कन्द जाति के इस पौधे को पहचान सकें।

तश्तरीनुमा नाव में बैठकर किसी की ज़िन्दगी की कीमत पर
अपने लिये आजीविका तलाश करता एक परिवार

मण्डोवी नदी से पुराने गोवा का एक दृश्य

दूर जहाँ एक फेरी खड़ी दिखायी दे रही है कभी वहीं से गोवा में प्रवेश किया था वास्को डि गामा ने  


धान के खेतों से घिरा, गोवा के गाँव का एक घर

पानी में खड़े ये पौधे धान के नहीं "कैवर्त मुस्तक" Cyperus rotendus के हैं।
र्ह्यूमेटॉयड अर्थ्राइटिस की श्रेष्ठतम औषधियों में से एक। इसकी मूल से बनी एक औषधि Arthrellaa के नाम से मेडिकल स्टोर में उपलब्ध है। मुस्तकारिष्ट नाम की एक और दूसरी औषधि भी उपलब्ध है।  

गोवा के गाँव में कोकणी परम्परा का एक घर

कटहल की शक्ल वाले इन फलों को नीर फणस (जल कटहल या नीर पनस) कहते हैं।

फलों का उपयोग खाने के लिये किया जाता है।


बादाम के फल

इसे कौन नहीं जानता...
पर मुझे तो इसकी पुष्प मंजरी बहुत आकर्षक लगती है  

गोवा की ये बिल्ली मुझसे बहुत नाराज़ है
मैंने इसका रास्ता काट दिया ना...इसीलिये तो

5 टिप्‍पणियां:

  1. मनोरम डॉक्टर साहब!!गोवा को देखने की एक अलहदा नज़र!!

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  2. सुन्दर पोस्ट. जिस फनस की बात कही गयी है वह कई दक्षिण एशियाई देशों में मुख्य आहार है (चावल/भात जैसा). लोग उबाल कर ही खा लेते हैं. अंग्रेजी में इसे ब्रेड फ्रूट कहते है. पके फल का स्वाद अच्छा नहीं होता (मेरे घर में हैं). कच्चे फलों को काट कर सब्जी भी बनायीं जाती है. आपने कोंकणी परंपरा के घर की बात कही है. इस प्रकार के घर वसई से चलकर केरल के अंतिम छोर तक (पश्चिमी तट) पायी जाती है. अच्छा लगा.

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    1. नवागंतुकों का हार्दिक स्वागत है।
      सुब्रमण्यम जी! जानकारी में इज़ाफा करने के लिये आभार।

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