रविवार, 11 नवंबर 2012

आयुष्यदाता

धन्वंतरिदेव आयुष्यदाता!

नमन देव स्वीकार कर लो हमारा।

अज्ञान से जन्म लेते रहे हम

अज्ञान में मृत्यु बुनते रहे हम॥

पुरुषार्थ का मंत्र अब गुनगुना दो

हमें मुक्ति का मार्ग अब तो बता दो॥

रहस्य तन औ मन का है क्या कहो तो

जीवन सहजतम ये कर दो हमारा॥

 

जीवन है पथहीन, घनघोर वन सा

शरीरं इदं गूढ़ ब्रह्माण्ड जैसा॥

दुर्गम जटिलतम विचित्रं रहस्यम्

हमें पथ बता दो सहजतम सरलतम॥

मन शांत हो और निर्मल हो तन भी

हितं हो परं, कर सकें परहितं भी॥

कैसे जियें, भेद सबको बता दो

अनुरोध स्वीकार कर लो हमारा॥

 

जब भी थकें हम, तुम शक्ति देना

कैसे चलें, मार्ग भी तुम बताना॥

हर जीव जग का, करे लक्ष्य पूरा

सुख से जिये, हो न जीवन अधूरा॥

बने दिव्य जीवन, वरदान यह दो

हटा कर तमस ये भर दो उजाला॥

घनी पीर है और है तेरा सहारा

नमन देव स्वीकार कर लो हमारा॥   


10 टिप्‍पणियां:

  1. स्वस्थ रहे सुखी रहें |
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |
    उत्कृष्ट प्रस्तुति पर बधाई -
    आदरणीय ||

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  2. आचार्य जी,

    चरण वंदन।

    दशरथ कुलदीपक कौशल्यानंदन अवधनरेश सियापति हनुमान आराध्य प्रभु श्री राम ... भक्त के कातर स्वर इस बार अवश्य सुनेंगे।

    'राम राज्य' लौटने वाला है। 'दुष्टों का शासन समाप्त होने ही वाला है।'

    दीपावली आपके लिए शुभ हो। मंगलमय हो।।

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  3. अज्ञान से ज्ञान को हम जाएँ
    अज्ञान राह में आये तो मुक्ति पायें
    स्वार्थ से हों दूर
    कर्ण का एक अंश ही पायें
    सत्य हरिश्चंद्र की राह अपनाएं ....

    शुभ दिवाली

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  4. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति
    मन के सुन्दर दीप जलाओ******प्रेम रस मे भीग भीग जाओ******हर चेहरे पर नूर खिलाओ******किसी की मासूमियत बचाओ******प्रेम की इक अलख जगाओ******बस यूँ सब दीवाली मनाओ

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  5. धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएँ

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  6. अनुपम भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

    !! प्रकाश पर्व की आपको अनंत शुभकामनाएं !!

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  7. बहुत सुन्दर भाव...

    मन शांत हो और निर्मल हो तन भी
    हितं हो परं, कर सकें परहितं भी॥

    बहुत शुभकामनाएँ.

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  8. शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन,पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने.बहुत खूब.
    बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.