सोमवार, 30 अगस्त 2010

वो एक पल......
मैं बयां क्या करूँ
दे गया क्या मुझे
.......वो एक पल.
ज़िन्दगी में मेरी,   .......वो .....ख़ास पल
दे गया क्या मुझे
........वो एक पल.
है ख़ूबसूरत क्या और इतना
जितना कि है.......वो एक पल.
बौनी हुई ये ज़िन्दगी.
इतना बड़ा...... है.....वो एक पल.
रख़ा है उसे सीने से लगा
दौलत है मेरी वो एक पल.
छू न जाए नज़र किसी की उसे
मेरा अपना है बस..... वो एक पल.
कुछ दीप हमने
थे सजा के रखे
आ के तुमने छुआ
और वो जल उठे.
 मेरा रौशन जहां
है उसी से हुआ
जीता हूँ अभी तक .....वो एक पल.
जाने क्या था हुआ........... कि मेरा हो गया
गुज़रा हुआ
बस..............वो एक पल.