बुधवार, 11 मई 2011

कुछ क्षणिकायें ........




कौआ


काले धन वालों को 
कभी नहीं काटता काला कौआ
वह तो काटता है 
केवल 
सच बोलने पर ही.
    
साहित्यकार जी 

वे संवेदनशील हैं 
इसलिए 'कलम के सिपाही' हैं 
वे 'सिपाही' हैं 
इसलिए अपनी पर उतर आते हैं .
सुना है .............
किसी समारोह में पुरस्कार के लिए 
लांघ गए थे सारी सीमाएं.  

बाध्यता बनाम अधिकार 

मतदान 
आपका अधिकार है 
और कातिलों को मतदान 
आपकी बाध्यता.

मालिक 

एस. पी. के बेटे 
उसके यहाँ तालीम लेने आते हैं.
बड़ी-बड़ी डिग्री वाले भी 
खिदमत करने आते हैं .
दरअसल .........
वह एक कोचिंग सेंटर का मालिक है 
इससे पहले 
इसी शहर का सट्टा किंग था 

मार्केटिंग मैनेज़र 

वह मार्केटिंग मैनेज़र है 
एक बड़े हॉस्पिटल का,
..................................
ये हॉस्पिटल........ 
मार्केट कब से हो गया ?

कपड़े 

जिन कपड़ों में 
कोई दीगर लड़की 
लगती है बड़ी कामुक
..........
छलकता है भोला बचपन 
जब पहनती है उन्हें   
मेरी सोलह बरस की बच्ची.  

योगायोग   

पूरे देश ने सीख लिया है योग  
और फेफड़ों की धौंकनी चलाना 
इससे हार्ट नहीं होता हर्ट 
और अटैक से बचाने में मिलती है मदद  
जब पड़ता है 
सी.बी.आई. 
या 
आयकर वालों का  छापा. 

शौक 

जन्म दिन पर हीरों के गहनों की भेंट 
उस गरीब ...
और दलित महिला का शौक है
वह शान-ओ-शौकत से रहती है 
वह आज भी गरीब और दलित है. 
काश ! मैं भी होता 
ऐसा ही गरीब और दलित.

उधार 

उधार 
प्रेम की कैंची है 
और कैंची 
उधार का प्रेम.