सोमवार, 21 अगस्त 2017

गोमाता जय जय माता



रथ के पहिये
आगे की ओर चलते हैं...  
आगे वाले,
पीछे की ओर चलते हैं...
पीछे वाले ।
पहिये चल रहे हैं
तेजी से बढ़ रहे हैं
रथ
वहीं खड़ा है
यथावत् ।
निरीह प्रजा
रथ को निहारती है
गोया
सृजन गोशाला की गायें
निहारती हों
ऊँची-ऊँची
सूनी दीवारों के पार
कल्पना के हरे-भरे खेत
और मीठे जल के सरोवर 
मर जाती हों फिर
तड़प-तड़प कर ।
चलो !
हम गोमाता का अंतिम संस्कार कर आयें
अपने महान आदर्शों का प्रदर्शन कर आयें