गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

बस्तर को बूझा ही किसने

मड़िया-आमा-चार क्या कहने
महुआ मस्ती फूलों के गहने
अचरज से भर मसला सबने    
बस्तर को बूझा ही किसने ।

बघवा जब तक रहे विचरते
गीत सुने मैना के सबने
क्यों मौन है मैना जंगल सूने
बस्तर को बूझा ही किसने ।

प्राण घुटे घोटुल के अपने
चतुरों ने आ बेचे सपने
चारागाह बनाया सबने 
बस्तर को बूझा ही किसने ।

जंगल नदिया बिखरे प्रस्तर
ले रत्न गर्भ में सोया बस्तर    
आया जो भी लगा वो छलने

बस्तर को बूझा ही किसने ।


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