रविवार, 3 अप्रैल 2022

दलबदल की लक्षमणरेखा

             पाकिस्तान की सल्तनत खोने जा रहे इमरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह गद्दारों को कभी नहीं भूलेगा। दूसरी ओर भारत में राजभर और शिवपाल यादव के भाजपा में सम्मिलित होने की चर्चायें होने लगी हैं। मोतीहारी वाले मिसिर जी को लगता है कि दलबदल के लिये भाजपा को एक लक्षमणरेखा खींच कर रखनी चाहिये। क्या दलबदल का इतिहास रचने वाले सत्तालोभी स्वामीप्रसाद मौर्य के लिये भी भाजपा अपने दरवाजे खुले रखने वाली है? अपर्णा यादव का तो भाजपा में आना आमजनता को स्वीकार है किंतु शिवपाल यादव का आना स्वीकार नहीं होगा। मुलायम के कुनबे ने सत्तालोभ की सारी मर्यादायें छिन्न-भिन्न कर डाली हैं। यह वह वंशवादी कुनबा है जो न तो लोकतांत्रिक है और न समाजवादी।

मिसिर जी का विश्वास है कि भाजपा का जब भी पतन होगा तब उसका सबसे बड़ा कारण गंदे नाले में बहकर आने वाला वह कचरा होगा जिसे संख्या बल के नाम पर भाजपा स्वीकार करती जा रही है ।

अगला राष्ट्रपति

समाचार है कि भारत के अगले राष्ट्रपति भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह होने वाले हैं। जो लोग डॉ. रमन सिंह को जानते हैं उन्हें पता है कि छत्तीसगढ़ में एक लम्बी पारी खेलने के बाद भाजपा का जितनी बुरी तरह पतन हुआ था उसका कारण क्या था! बहरहाल, मोतीहारी वाले मिसिर जी को लगता है कि इस समय भारत के अगले राष्ट्रपति के लिये मोहम्मद आरिफ़ ख़ान से अधिक उपयुक्त व्यक्ति शायद ही और कोई हो।    

2 टिप्‍पणियां:

टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.