बुधवार, 18 अप्रैल 2012

मेनका बनने की प्रतिस्पर्धा

फेस बुक पर
फेस टु फेस हो रहे
ख़ूबसूरत, मासूम भारतीय चेहरे,
आभिजात्य परिवारों के रक्तांश...
सनातन संस्कृति की वर्जनाओं को तोड़ते
पश्चिम हो चले हैं।  

मेनका बनने की प्रतिस्पर्धा में
ये कामुक लड़कियाँ
अपनी-अपनी खिड़कियों से झाँकती
आमंत्रित करती हैं
शोहदों, लुच्चों, लफंगों और कामी शूकरों को
अपने वाल-पेपर पर। 
वे आते हैं
झुण्ड के झुण्ड
मंडराते रहते हैं
भूखे गिद्धों की तरह,
मांस खाने को आतुर
नारी शरीर के कुछ विशेष अंगों का।
आते ही
छिछिया कर बिखेरने लगते हैं
कुछ ध्वनियाँ और चित्र उगलते
पाशविक-काम के कुछ शब्द।

कोठों जैसे दृश्य
तैरते हैं फेस बुक पर
मासूम से चेहरों की कामेच्छा
संतुष्ट हो पा रही है
या और भी उद्दाम
कौन जाने !
हमें तो केवल
इतना ही पता है
कि रचे जा रहे हैं
वात्स्यायन के नहीं
भटकते कामप्रेत के
नए कामसूत्र।
भोले और मासूम चेहरे वाली
ख़ूबसूरत लड़कियाँ,
जो आने वाले समय में
हमारे-आपके घरों में आयेंगी
बहू बनकर
अभ्यास करने लगी हैं
अभी से
बहू बाज़ार का।
हमने भी
आपकी ही तरह
आँखें बंद कर ली हैं अपनी।
हुंह..........!
मेरी लड़की नहीं होगी
इस फेसबुकिया
कमाठीपुरा की गलियों में। 
होगी.......कोइ कालगर्ल टाइप की।

कोई हमें बेशर्म न कहे
इसलिए
शुतुर मुर्गियाना ध्यान में
लीन हो चले हैं हम सब,
ईश्वर से यह मनाते हुए
कि हे भगवान! ये ख़ुशफ़हमी
ग़लतफ़हमी न निकले कहीं
वरना ये घर
कोठा बन जाएगा
जीते जी हमारे।