रविवार, 22 मार्च 2026

कब तक

युद्ध
कभी तो रुकेगा
पर कब?
बचाने महाविनाश
और अधिक होने से पहले
या उसके बाद?
महत्वपूर्ण है
व्यक्तिगत लाभ
और अहंकार से अधिक
तुरंत रोकना
इस महाविनाश को।
पहल जो भी करेगा
झुकने की
फलों से लदी डालियों की तरह
वही माना जाएगा महान।
भारत कहता है-
दृढ़ता तोड़ती है
मृदुता जोड़ती है
इसलिए प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए
कि कौन होगा पहले मृदु
और महान
इतिहास के पृष्ठों में ही नहीं
लोगों के हृदयों में भी।
अमेरिका तो नया है
पर बहुत पुरानी संस्कृतियाँ हैं
इज्रेल और ईरान की,
कोई नहीं चाहेगा
इन्हें खो देना
सदा के लिए
महाभारत युद्ध की तरह।

शनिवार, 21 मार्च 2026

अभियान घरवापसी

हिंदूराष्ट्र का सपना बेचने वाले डीएनए विशेषज्ञ मोहन भागवत मुसलमानों की घर वापसी की बात करते हैं। उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने दस लाख हिंदू कन्याओं को मुसलमानों से निकाह करने के लिए प्रेरित कर उन्हें मुस्लिम घरों में पहुँचा दिया। यह बात स्वयं इंद्रेश कुमार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मार्च २०२६ में बताई। इंद्रेश का विचार है कि इस तरह हिंदू लड़कियाँ मुस्लिम घरों में जाकर उन्हें बदल देंगी।

इंग्लैण्ड में शरणार्थी बनकर गये मुसलमानों ने अभी हाल ही में एक प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने नारा दिया- "अंग्रेजो इंग्लैंड छोड़ो"।
ईरान के कट्टरवादी सांप्रदायिक ख़लीफ़ा ख़ामेनेई की मृत्यु के बाद भारत के मुसलमानों ने स्वयं को भारतीय नहीं, ईरानी बताया और देश भर में रोते हुए प्रदर्शन किये। और यहाँ इंद्रेश को लगता है कि हिंदू लड़कियाँ मुसलमानों को बदल देंगी। इस बदलाव की प्रक्रिया और स्वरूप कैसा होगा यह इंद्रेश ने अविमुक्तेश्वरानंद को नहीं बताया।

सिकलिंग की घरवापसी
थैलेसीमिया की तरह सिकलिंग भी एक आनुवंशिक हीमोग्लोबिनोपैथी का परिणाम है जो अचिकित्स्य व्याधि है।
चिकित्सा विज्ञान मानता है कि गुणसूत्रीय क्रमिक न्यूनता के साथ इसे धरती से समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए सिकलिंग वालों को सामान्य (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) लोगों से विवाह करना चाहिए। सिकलिंग मेजर और माइनर (ट्रेट) के आधार पर ऐसे विवाहों की दो स्थितियाँ हो सकती हैं,अर्थात-
१. सिकलिंग मेजर + सामान्य = १००%सिकल सेल ट्रेट
२. सिकल सेल ट्रेट + सामान्य = ५०% ट्रेट और ५०% सामान्य।

यदि हर पीढ़ी के बच्चों के विवाह हर बार सामान्य व्यक्ति से होते रहें तो इस तरह कुछ पीढ़ियों के बाद सिकलिंग समाप्त हो जाएगा। यह एक गणितीय अनुमान है जिसमें ५०% बच्चे सामान्य और ५०% सिकलिंग ट्रेट के होंगे। किंतु एक्स-वाई के खेल इतने सीधे-सरल नहीं होते जितने वे गणितीय (सांख्यिकीय) विश्लेषण में दिखाई देते हैं। कोई नहीं जानता किसी जोड़े के कितने बच्चे होंगे और उनमें से कितने जीवित रहेंगे।
प्रांतीय सरकारें इस तरह के विवाहों को प्रोत्साहित करने के लिए धनराशि भी प्रदान करती हैं। यह लगभग वैसा ही है जैसा कि दो असमान रेखाओं को समान बनाने के लिए बड़ी रेखा को काट कर छोटी के बराबर कर देना। आम जनता के बीच सब कुछ उद्घाटित नहीं किया जा सकता अतः मैं यह नहीं बताऊँगा कि हीमोग्लोबिनोपैथी किन लोगों में होने की प्रायिकता होती है। जिज्ञासु लोग गूगल बाबा से पृच्छा कर सकते हैं।
सिकलिंग रोगियों की घर वापसी का यह कार्यक्रम कितना सफल होगा, कोई नहीं जानता। यह भी सुनिश्चित नहीं है कि घरवापसी के बाद यह पुनः नहीं होगा। जिन परिस्थितियों में हीमोग्लोबिनोपैथी का जन्म हुआ था, यदि वैसी ही परिस्थितियाँ पुनः उत्पन्न हुईं तो क्या यह फिर नहीं होगा, इसका उत्तर वैज्ञानिकों के पास नहीं है।

इंद्रेश कुमार का मुसलमानों की घर वापसी का तरीका भी सिकलिंग की घर वापसी जैसा प्रतिलोम है, अनुलोम नहीं। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि हमारी लड़की मुस्लिम घर में जाकर घर वापसी कैसे कराएगी? यह गंगा के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी से गोमुख तक वापस ले जाने की अवैज्ञानिक और अव्यावहारिक कल्पना है। वर्षों पहले जो लोग मतांतरित हुये उन्हें हमारे घर आना चाहिए या जो मतांतरित नहीं हुये उन्हें मतांतरित घरों में जाना चाहिए? संघ के चिंतक अपने घर का पता या तो भूल गये हैं या फिर उन्होंने घर ही बदल लिया है।
भारत के लोगों ने मोहनदास को समझने में भारी भूल की और अब उनकी मृत्यु के बाद उनका स्थान मोहन भागवत, इंद्रेश कुमार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ले लिया है। तब एक गांधी था, आज उसके बहुत से प्रतिरूप हमारे बीच में हैं।

बुधवार, 18 मार्च 2026

विकल्प

समाज के विघटनकारी ध्रुवीकरण के लिए जितने उत्तरदायी मोदी, मोहन भागवत और अमित शाह हैं, स्वयं हिंदू समाज भी उनसे कम दोषी नहीं है। भ्रष्टाचार से समझौता कर चुके हिंदू समाज ने मुस्लिम आतंकवाद से मुक्ति की आशा में कांग्रेस के विकल्प स्वरूप भाजपा पर विश्वास किया और उसके भक्त हो गये। मोदी प्रारंभ में तो अवश्य हिंदू राष्ट्र की बात करते रहे पर इसके बाद उन्होंने न केवल सवर्णविरोधी विषाक्त वक्तव्य भी दिये अपितु सनातनियों के सामान्य नागरिक अधिकार छीनने के षड्यंत्र भी करते रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप सवर्ण इस देश का सर्वाधिक असुरक्षित, पीड़ित और वंचित समूह होता चला गया। हिंदूराष्ट्र की आशा में हम सब मोदी के विषाक्त भाषणों की अनदेखी करते रहे, हमारी भक्ति अपने चरम की ओर बढ़ती रही और मोदी हमारे समूल उच्छेदन के बीज बोते रहे। मोदी के विषाक्त भाषणों के बाद भी लगातार तीन बार हमने मोदी को देश की बागडोर सौंपी, पर कभी विकल्प के बारे में सोचा भी नहीं।

आप अपनी गाड़ी में एक वैकल्पिक चक्का रखते हैं पर लोकतंत्र के रथ में कभी किसी ने वैकल्पिक चक्के की आवश्यकता नहीं समझी। सावधान! किसी एक पर अतिनिर्भरता शोषण के कई द्वार खोलती है। मोदी और उनके मंत्रियों ने केवल उन लोगों की चिंता की जो देश को आगे ले जाना तो दूर सदा बाधक और विनाशक ही बने रहे, वह भी उन लोगों के शोषण और उत्पीड़न के मूल्य पर जो देश के विकास और समृद्धि के सदा से महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। यह केवल विकासकारी तत्वों की उपेक्षा का ही विषय नहीं है, अपितु उनके साथ घृणित अत्याचार और शोषण की क्रूरता का भी विषय है।
हिंदू हृदय सम्राट नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में हमने भोगा है -
विद्यालयों में हिंदू बच्चों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न, सांस्कृतिक चिन्हों और प्रतीकों के अपमान की बढ़ती घटनायें, मतांतरण का दबाव, प्रेमजेहाद, भूमिजेहाद, चिकित्सा जेहाद, सांस्कृतिक जेहाद...। हम भोग रहे हैं सर तन से जुदा की क्रूर घटनायें, हिंदू पलायन, खाद्य-पेय पदार्थों में थूक-मूत्र मिलाने की निरंकुश घटनायें, सवर्णों को जूते मारकर यूरेशिया भगाने की धमकियाँ, ब्राह्मण कन्यायों के यौनोत्पीड़न की घटनायें, सवर्ण होने के कारण मारपीट और हत्यायें, आरक्षण के नाम पर सवर्णों को बिना किसी निरीक्षण-परीक्षण के अपराधी मानकर कारागार में डाल देने वाले विधान के प्रस्ताव को न्यायसंगत सिद्ध करने के विनाशकारी हठ, प्रतिभापलायन की स्थितियाँ उत्पन्न करने के लिए विविध उपाय.... सवर्ण यही सब देखने और भोगने के लिए विवश होते रहे हैं। भाजपा ने अपने राजनीतिक चरित्र से बारंबार प्रमाणित किया है कि हिंदू समाज को तोड़ने में वे कांग्रेस और सपा से भी बहुत आगे निकल चुके हैं। तथापि, यूजीसी रेगुलेशन बिल लाने के लिए मोदी जी और उनकी "यूजीसीसमिति" के लोग धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने सारी नैतिकताओं की लक्ष्मण रेखायें पार कर हिंदुओं को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अभी भी समय है, राष्ट्रवादी नागरिकों को भाजपा, कांग्रेस और सपा के विकल्प गठन पर गंभीरता से विचार करना ही होगा। हम किसी भी वर्तमान राजनैतिक दल पर भरोसा कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। सभी दल अरविंद केजरीवालसंप्रदाय और कांग्रेस का अनुसरण करने की प्रतिस्पर्धा में दौड़े चले जा रहे हैं। जब सत्ता निरंकुश होती है तो जनता को अपने दायित्व निभाने के लिए आगे आना होता है।

मंगलवार, 17 मार्च 2026

मूल्यविहीन शिक्षा

क्या शिक्षा सचमुच हमें नैतिक, संस्कारी और मानवीयगुणों से संपन्न करती है?

देश भर में धरमशाला जैसी न जाने कितनी क्रूर घटनायें तो यही प्रमाणित करती हैं कि शिक्षा का इन सबसे कोई संबंध नहीं होता। तब प्रश्न यह खड़ा होता है कि फिर शिक्षा की हमारे जीवन में उपादेयता क्या है?
अनुभव तो यही बताते हैं कि हम कितने भी शिक्षित क्यों न हो जाएँ, बर्बरता कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
धरमशाला में बीएड की एक छात्रा को चार लड़कियों ने महीनों प्रताड़ित किया, प्रोफ़ेसर ने यौनोत्पीड़न किया, फिर चिकित्सा के अनंतर छात्रा की मृत्यु हो गई।

अनैतिक और कुपात्र लोग जब शिक्षक बनते हैं तो वे समाज को केवल पतन की ओर ही ले जाते हैं। स्वतंत्र भारत की शिक्षा व्यवस्था इतनी पापपूर्ण क्यों है और हम यह सब सहने एवं भोगने के लिए विवश क्यों हैं? हमने यह कैसा देश बनाया है!

जोड़-तोड़ करके संविधान लिख कर रख लेने भर से किसी देश की व्यवस्था आदर्श नहीं हो जाती। इतने वर्षों में हम तो उसे समझने-समझाने की क्षमता तक विकसित नहीं कर पाये, न संविधान का मूल संदेश आम जनता को दे सके, तब संविधान के अनुरूप देश का निर्माण करना तो बहुत दूर की बात है।
१९४७ से आज तक हम अपने समाज के लिए अपनी शिक्षा व्यवस्था भी नहीं बना सके। सब कुछ पराधीनता वाले युग की बनी-बनाई लीकों पर चलता रहा और हम सब छद्म स्वाधीनता में आत्ममुग्ध बने रहे।
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सोमवार, 16 मार्च 2026

आत्मनिर्भर पराधीन भारत

इसमें कोई संदेह नहीं कि आईटी में निष्णात होने के बाद भी हम आत्मनिर्भर नहीं हैं इसलिए अमेरिका से पंगा नहीं ले सकते। चीन और रूस के पास उनकी अपनी-अपनी आईटी व्यवस्था है।

हमारे आईटी वैज्ञानिक अमेरिका में काम करके उसे आत्मनिर्भर बनाते हैं। कुछ पूर्णनिर्लज्ज माननीय जी यह भी कह सकते हैं कि भारतीय वैज्ञानिक लालची और देशद्रोही होते हैं इसलिए वे पलायन कर जाते हैं। स्वयंभू हिंदू ठेकेदार कह देंगे कि हिंदू वैज्ञानिकों में राष्ट्रप्रेम और संस्कारों का अभाव है। माँ-बाप को चाहिए कि अपने बच्चों में जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का भाव जागृत करें और मुसलमानों में छिपे हुये अपने पूर्वजों के डीएनए पहचानें जिससे भारत की प्रतिभा पलायन को रोका जा सके।
मेरा मत इन सभी विद्वानों, तर्कशास्त्रियों और राष्ट्रप्रेमियों से पूरी तरह भिन्न है। यूजीसी प्रकरण के बाद की घटनाओं ने मुझे राष्ट्रप्रेमी से कम्युनिस्ट बना दिया है। यह मेरे लिए वांछनीय नहीं था, किंतु वैचारिक व्यभिचार की यंत्रणा से बिलबिलाकर मुझे कम्युनिज्म की कड़ाही में कूदने के लिए विवश होना पड़ा है। ...तो अब मुझे चीनी व्यवस्था भारतीय व्यवस्था की तुलना में कई गुना अच्छी लगने लगी है। हम पाखंडी और षड्यंत्रकारी हैं, चीन में जो भी है अच्छा-बुरा सब खुला हुआ है। कहीं कोई ढकोसला नहीं। भारत में टाटा है सुंदर पिचाई है, इसके बाद भी आईटी में हम पराधीन हैं और अमेरिका को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
महाभारत टीवी धारावाहिक में हम वर्षों पहले क्लस्टर बाण वर्षा की अवधारणा को देख चुके हैं, ईरान ने क्लस्टर अग्निबाण बना भी लिए और हम आत्ममुग्धता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं कर पाये।
हम २०१४ से २०२५ तक लगातार ११ वर्षों तक राष्ट्रप्रेम में इतने डूबे रहे कि यह भी नहीं देख सके कि अगर अमेरिका ने अपनी आईटी के दरवाजे हमारे लिए बंद कर दिए तो पूरा भारत ठप्प हो जाएगा। इसरो, आर.एण्ड डी., बैंक, उद्योग, परिवहन, कार्यालयीन कार्य, साइबर प्रणालीऔ... सब में आपातकाल लग जाएगा।
तो क्या किया जाय?
कुछ न किया जाय। हिंदुत्व और राष्ट्रप्रेम में डूबे रहा जाय। यूरेशियन भारत छोड़ो को सुना जाय। तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार गीत का आनंद लिया जाय, और अपनी बेटियों का "शुद्धिकरण" करवाने के लिए, जो माँग रहे हैं उन्हें सौंप कर उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाय। तदुपरांत हिंदूसमाज में बोई जाती रही आरक्षण की विषबेल में मधुर और सुगंधित फल लगने प्रारंभ हो चुके हैं, उन्हें तोड़कर खाया जाय और चैन की नींद सोया जाय। जब नींद खुलेगी तब सामने खड़े पाषाणयुग को भी स्वीकार करके जी लेंगे। बाकी काम तो महामानव और ठेकेदार कर ही रहे हैं।

जीत-हार

एशिया जल रहा है

यूरोप झुलस रहा है
अमेरिका पंगु हो रहा है।
इस महायुद्ध में
न कोई हारेगा
न कोई जीतेगा
दोनों कहेंगे -
ना तुम जीते
ना हम हारे।
व्याख्याकार
रंग भरेंगे
अपनी-अपनी सुविधा से
देखेंगे सुनेंगे लोग
रंगीन व्याख्यायें
अपनी-अपनी सुविधा से।
ट्रंप फिर फैलाएगा थैला
सर्वोच्च पुरस्कार के लिए
या दे देगा कोई पुरस्कार
स्वयं को ही, बनाकर एक समिति।
बस, कुछ लोग
वापस नहीं आयेंगे कभी
जिनका दोष है इतना सा
कि जन्मे हैं वे
उस देश में
जिनके राजा
भरे हुये हैं
परमाणु बम रखने की
आत्ममुग्धता से।
हमें गर्व है
कि आर्यावर्त्त
कल भी उडुपी था
आज भी उडुपी है
जो भी हैं युद्धरत
देता है भोजन औषधि
दोनों पक्षों को
रहकर निष्पक्ष
कौरव हों या पांडव
इज्रेल हो या ईरान
रूस हो या यूक्रेन
सर्वे भवंतु सुखिनः
सर्वे संतु निरामयाः।।

रविवार, 15 मार्च 2026

प्रतिस्पर्धा

भारत के अय्यर ब्राह्मण आदिशंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत समर्थित षण्मत (शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य, गणेश और स्कंद) के उपासक माने जाते हैं। आदिशंकराचार्य ने तत्कालीन षण्मत मतभेंदों को समाप्त करने के लिए जिस अद्वैत मत को प्रतिपादित किया, मणि शंकर अय्यर उसी स्मार्त (स्मृति) परंपरा के वाहक हैं। आदिशंकराचार्य शाकाहारी थे पर मणि शंकर अय्यर ने "कबाब प्रतिस्पर्धा" के आयोजन का आह्वान किया है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित है।

मणिशंकर अय्यर के सम्मान में प्रस्तुत है यह रचना -

असहिष्णुता से बोली
सहिष्णुता,
हिंसा से बोली
अहिंसा
आओ वार्ता करें
कुछ प्रतिस्पर्धा करें
"यद्यपि अच्छे हो सकते हैं
तुम्हारे कबाब,
पर अच्छे हैं हमारे कबाब भी
तुम्हारे कबाबों से"।

समान है
हमारी भाषा, मानसिकता और संस्कृति
समान है उर्दू और संस्कृत
समान है रक्त और दुग्ध
समान है पैगंबरवाद और बहुदेववाद
समान है घृणा और प्रेम
समान है मृत्यु और जन्म
आओ हम एक हो जाएँ
मृत्यु में समाहित हो जाएँ
षण्मत को परे हटायें
एक थाली के कबाब हो जाएँ
गाय खाएँ, वाराह भगाएँ
भारत को विभाजन से बचाएँ।

युग नया है
आदिशंकराचार्य विगत हुये
पैगंबर सामयिक हुये
स्मृति लुप्त हुई
हदीस गीता हुई
आओ, हम हदीस गाएँ
देश को विभाजन से बचाएँ।

एकेश्वरवाद की कट्टरता
सहिष्णुता लाती है,
स्मृति
हमें असहिष्णु बनाती है
देश को हिंदूराष्ट्र बनाती है
हिंदूराष्ट्र एक वैश्विक संकट है
जिससे अवश्यंभावी है होना
देश के तेंतालीस टुकड़े।
आओ, हम देश बचाएँ
भारत को पाकिस्तान में मिलाएँ।

उसने फेक दी
उठाकर शिव की मणि
हिंदमहासागर में नहीं
अरबसागर में
चबाते हुए कबाब
होकर चिंतित
कि होने ही वाले हैं
देश के तेंतालीस टुकड़े
आओ, हम देश को बचाएँ
भारत को पाकिस्तान में मिलाएँ।