मैं
छोटे-छोटे देश चबाता हूँ
बड़े-बड़े ऊर्जास्रोत निगलता हूँ
निर्लज्जता पीता हूँ
दुनिया भर को धमकाता हूँ
मित्रों पर धौंस जमाता हूँ
राष्ट्रपति को सपत्नीक उठा कर
अपनी माँद में ले आता हूँ
क्योंकि...
मैं एक असभ्य राष्ट्रपति हूँ।
मैं
अराजकता से
अपना श्रृंगार करता हूँ
विद्रूप मुखमुद्रायें बनाता हूँ
जो नहीं बोलना चाहिए
वह अवश्य बोलता हूँ।
सावधान!
अब कुछ भी नहीं होगा पहले जैसा
मुझसे पूछकर उगना होगा
पौधों को
मुझसे पूछकर खिलना होगा
फूलों को
मुझसे पूछकर साँस लेना होगा
धरती के हर मनुष्य को,
कोई किससे बात करेगा
क्या बात करेगा
क्या व्यापार करेगा
सब कुछ मैं ही तय करूँगा।
भोजन भी पहले मैं ही करूँगा
बचा-खुचा खायेगी दुनिया
क्योंकि मैं...
धरती का सबसे बड़ा असुर हूँ
और...
मुझे चाहिये
शांति, पवित्रता और नैतिकता का
सबसे बड़ा विश्व पुरस्कार।
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