सोमवार, 19 जनवरी 2026

शांति का मूल्य

बिकते थे पद

यूरोप में खुले आम

फिर हुयी एक क्रांति

और धर्म को जकड़ दिया गया 

बेड़ियों में

काट डाले गये 

पंख

निर्वासित कर दिया गया

समाज की सभी गतिविधियों से

उस धर्म को

जो वास्तव में था ही नहीं 

कोई धर्म।


अब पश्चिम 

एक बार फिर

गढ़ रहा है नयी परिभाषायें

बुन रहा है नयी चादरें

ढकने के लिए 

बनने वाले नये कबीलों को ।

शांति 

बहुत मूल्यवान हो गयी है

नया भाव है

एक करोड़ डाॅलर

प्रति दो वर्ष!


शांति के लिए 

अशांति की धौंस!

निःशस्त्रीकरण के लिए

परमाणु बम की धमकी!

कुछ लोगों ने बाध्य कर दिया है

प्रवेश करने के लिए 

हर किसी को  

एक असभ्य और क्रूर युग में ।

जो मैं देख पा रहा हूँ

क्या आप भी देख पा रहे हैं वही?

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