सोमवार, 18 अप्रैल 2011


पढ़ा लिखा 

वह 
ढोल पीटकर 
सबको सचेत करता रहा 
शेर को बदनाम करता रहा 
फिर एक दिन 
मौक़ा देख
पहले शिकार को 
फिर शेर को 
मार कर खा गया
ढोल वाला 
सभ्य सा दिखने वाला 
एक पढ़ा लिखा आदमी था     

 २- कुतर्क 

मैं ही नहीं 
दुनिया का हर प्राणी है 
अवसरवादी
चिड़ियों को ही देख लो
सुबह पूरब को 
तो शाम पश्चिम को   
भरती हैं उड़ान 
अपने स्वार्थ की
उन्हें भी है पहचान 
फिर लोग क्यों करते हैं
सिर्फ मुझे ही बदनाम 

३- तर्क 

वह 
तमसोमा ज्योतिर्गमय 
जपता रहा
तमस को ओढ़ता रहा
चिड़ियाँ 
प्रेम के गीत गाती रहीं
सुबह पूरब 
और शाम पश्चिम की 
उड़ान भरती रहीं
उन्हें 
दिशा का ज्ञान नहीं 
मंत्र की पहचान नहीं
वे तो सिर्फ 
सूरज के साथ जागतीं 
सूरज के साथ सोतीं
दिन भर उसी का अनुगमन करतीं 
तमसोमा ज्योतिर्गमय को जीती हैं
सुना है 
उन्हें रात को गहरी नींद आती है
बिना मन्त्र का जप किये
मनुष्य 
तरसता है
ज़रा सी नींद के लिए 
इतने जप करने के बाद भी

४- वैज्ञानिक 

वह 
दिन भर सपने देखता है 
रात भर नींद को तरसता है
फिर नींद पर शोध करता है 
नींद की गोलियाँ बनाता है
और इस उपलब्धि पर 
अपनी पीठ ठोंकता है 
इस बीच 
नींद 
और भी दूर भाग गयी है