रविवार, 25 दिसंबर 2011

रिश्ते ...


Posted by Picasa   
1- 
सड़क किनारे
बूढ़े वक़्त ने
अपनी दूकान सजा ली है.
युवा वक़्त ने 
खरीदे हैं कुछ नाज़ुक से रिश्ते
वह खेलेगा इनसे,
फिर सिरा देगा 
किसी 
तालाब में.


२-
रिश्ते 
कभी गर्म हुआ करते थे 
बूढ़ी हथेलियों की गर्माहट से 
अब 
गर्म रिश्ते भी गर्म नहीं लगते 
जवान हथेलियों के स्पर्श से.


३-
ठंडी राख से लगते हैं 
रिश्ते, 
इनमें गर्माहट क्यों नहीं है ?
जबकि सुनते हैं, 
दुनिया परेशान है 
ग्लोबल वार्मिंग से.


४-
पत्थर सी ठोस बर्फ को 
बहते देखा है कभी ?
कभी खोल सको 
अपनी धमनियाँ 
तो देख सकोगे 
बर्फ को बहते हुए.


५-
सुनते हैं ....
रिश्तों की गर्माहट 
अब देह में आ गयी है.
और देह में 
पलीता लगाना पड़ता है  
चलने के लिए.


६-
वो मुस्कराते हैं 
तो फूल नहीं झड़ते
वो रोते हैं 
तो आंसू नहीं गिरते.
एक दिन छू के देखा 
तो वो पत्थर के सनम निकले.


७-
यूँ मुस्कुरा के 
धोखे में क्यों रखा हमें. 
यूँ गुनगुना के 
धोखे में क्यों रखा हमें.
जबकि पता था तुम्हें 
किराए पे लाये हो इन्हें,
लौट जायेंगे सब 
वक़्त पूरा होते ही.


८-
वो तो चल दिए 
छू के हमें 
पत्थर जान के. 
हम तो बुत ही भले थे 
अब क्या करें 
कहाँ जाएँ 
अहिल्या बनके ?  


९-
हे भगवान !
तू इस दुनिया को 
रेल का डब्बा क्यों नहीं बना देता,
सफ़र के शुरू से आख़िरी तक 
कोई रिश्ता दर्द नहीं देता.