वह सृजित करता है
जातियाँ ही नहीं,
पाप
पुण्य
और भगवान भी।
वह
समुच्चय है
सभी शक्तिमानों की शक्तियों का
अवतारी है
स्वयं भी
बात करता है ईश्वर से
बात के निपात से
सबको अचंभित करता है।
उसके राज्य में
जो भी सच बोलता है
वह
उसे मार कर खा जाता है।
वह चढ़ता है
सीढ़ियों पर रखकर अपने चरण
कुचलकर दमन करते हुए
हर उपभोग की जा चुकी सीढ़ी का।
वह पिछड़े से दलित हो गया
बनते-बनते विश्वगुरु
नहीं बन सका विश्वगुरु
पर बन गया
अवतारी भगवान
भगवान की जय हो!
जो नहीं बोलेगा जय
वह मारा जाएगा
साक्षात काल के हाथों
इसलिए
भगवान की बार-बार जय हो!
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