शनिवार, 18 अप्रैल 2026

वंचितx१०टु द पाॅवर पाँच लाख

अठारहवीं शताब्दी के तीसरे दशक में

सिंधिया राजवंश के संस्थापक
राणोजीराव सिंधिया को
नहीं था पता
कि बीसवीं शताब्दी में
जब जातीय वर्गीकरण करेगा
कोई राजा
वह चिन्हित करेगा
सिंधिया के वंशजों को
पिछड़ा।
महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया
हो गये हैं अब
वंचित, पीड़ित शोषित
और पिछड़ा।
ना...ना...
भगवान ने नहीं
किसी ब्राह्मण ने नहीं
किसी पंडित ने नहीं,
एक अति पिछड़े सम्राट ने
जो कुछ वर्ष पहले ही बना था
पिछड़ा,
फिर एक दिन अचानक
बन गया अति पिछड़ा भी
उसी ने...
उसी सम्राट ने बना दिया
महाराजा राणोजीराव सिंधिया के
राजवंश को
पिछड़ा।

किसी को नहीं पता
कब कोई राजा बना देगा
किसी को भी दलित या अगड़ा
पिछड़ा या अति पिछड़ा
या कुछ और ...
यथा,
अति-अति पिछड़ा
या नितांत गड़बड़ा
या धरती का
"सर्वाधिक वंचित
इन टु टेन टु द पाॅवर पाँच लाख...
साल से प्यासा" ।

राजा घोषित करता है
पहले स्वयं को अछूत
फिर किसी को भी अछूत
और थोप देता है
अपने सारे अपराध
ब्राह्मणों पर
कोसते हुये उनके पूर्वजों को
और देते हुये दंड
उनके वंशजों को,
सदा से
यही तो होता आया है
अन्यथा आप ही बताइए
किस पंडित ने
कब बनाई थीं
जातियाँ
और उनके वर्गीकरण?

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