बुधवार, 8 अप्रैल 2026

नया भगवान

हठ कर बैठ गया

आमरण अनशन पर
सोचकर
कि कल तक
पंक्तिबद्ध खड़े होंगे
कई मंत्री
लेकर संतरे का रस।
मैं नहीं पिऊँगा रस
करूँगा हठ
"मैं तो चंद्र खिलौना लै हों"।
फिर
जब मनुहार करेगा विश्व
तो पी लूँगा रस
गटागट
फिर मैं करूँगा
विजयनृत्य
जय जयकार होगी मेरी
मिल जाएगा मुझे
धरती का सबसे बड़ा पुरस्कार
और मैं बन जाऊँगा
धरती का भगवान।

पर कोई नहीं आया
तब मैंने
इससे कहा
उससे कहा
कोई तो आओ
मुझे संतरे का रस पिलाओ
एक भिक्षु ने देखा
तो दौड़ा आया
मुझे रस पिलाया
पात्र अपनी झोली में रख लिया।
अनशन से मुक्ति मिली
नृत्य गया भाड़ में
मेंने तो पहले ही कह दिया था
ना मैं हारा
ना तू जीता
चलो अब फिर से
तेल निकालें
अपने-अपने कुयें से।

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