शनिवार, 2 मई 2026

ब्राह्मण की बेटी

दिन

मजदूर दिवस
वर्ष 
दो हजार छब्बीस।
पुणे का नसरापुर गाँव
गाँव का प्यासा भीमाजी कांबले
एक ब्राह्मण बच्ची
आयुषी कुलकर्णी
आई थी ननिहाल
एक दलित
एक ब्राह्मण
दलित ने देखे पैंसठ वसंत
बच्ची ने चार
बच्ची को नहीं पता वसंत
दलित को पता
वसंत में कैसे करते हैं पतझड़।
बच्ची के पूर्वज
आये थे यूरेशिया से
ऐसा लोग कहते हैं।
भीमाजी के पूर्वज
मूलनिवासी
ऐसा लोग मानते हैं।
सत्य
कितने लोग जानते हैं!

दो-

सरकार कहती है
नेता कहते हैं
इस देश के संसाधनों पर
पहला अधिकार
दलितों का
अर्थात
उपभोग के लिए
धरती उनकी, विधान उनका
देश उनका, न्याय उनका
सरकार उनकी
और
नन्हीं सी बच्ची भी उनकी
इसलिए
मूलनिवासी ने किया
यूरेशियन बच्ची से यौनदुष्कर्म
फिर पीटा, पत्थर से कुचला
फिर गाड़ दिया
गोबर के ढेर में।

तीन-

सम्राट ने
अदला-बदली कर दी है
संज्ञाओं की
एक अच्छे समाधान के लिए
अब
कुकर्म को पुण्य कहना
हत्या को मोक्ष कहना
अपराध को न्याय कहना
पीड़ित को उत्पीड़क कहना
सच्चा समाधान है
दलित हितकारी है।
इस नव्य न्याय के अनुसार
पीड़ित वह बच्ची नहीं
वह दलित वृद्ध है
और उत्पीड़क वह वृद्ध नहीं
वह बच्ची है
अतः
गोबर के ढेर में से
निकालकर बच्ची का शव
कड़े से कड़ा दंड दो
दलित को
भारतरत्न दो
और लिपिबद्ध करो
इतिहास की नन्हीं सी
एक बूँद यह भी
कि दलित प्यासे हैं
पिछले पाँच हजार सालों से।