जिसने किया प्रथम बार
दशमलव का व्यवहारजिसने किया प्रकाशित
वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात
जिसने सुलभ कर दीं
ज्यामितीय रचनायें
और खगोल के रहस्य
जिसने सुयोजित किये सूत्र
त्रिकोणमिति और क्षेत्रमिति के...
ऐसे प्रकाण्ड विद्वान को
धकेल दिया जाता है
नेपथ्य के किसी कोने में
क्योंकि वह नहीं कर पाता
प्रभावित
मतदान और उसके परिणाम।
भारत में
नहीं होता किसी को गर्व
आर्यभट्ट पर
क्योंकि वह ब्राह्मण है
जिसने पीने नहीं दिया
नीर
पाँच सहस्र वर्षों तक
पता नहीं किन्हें?
उसी भारत में
पलकों पर बैठ गया
जिसने त्याग दिया
अपने पूर्वजों का धर्म
अपनी सांस्कृतिक परंपरायें
करते हुये निराधार आलोचनायें
ब्राह्मणों की,
करते हुये दासता
ब्रिटिश महारानी की,
वही होता है पूज्य
और प्रातःस्मरणीय
स्वाधीन भारत में
क्योंकि वह
संपन्न और शिक्षित होकर भी
रहता है दलित...
एक जाति
सत्तारचित
ताकि प्रतिभावान
यदि ब्राह्मण हो
तो दी जा सकें उसे गालियाँ
करने प्रशस्त
अपने-अपने राजपथ।
गणितज्ञशिरोमणि आर्यभट्ट!
तुमने जन्म ही क्यों लिया
कुसुमपुर में!
तुम्हें तो
स्मरण करता है पेरिस
प्रतिपल
जहाँ तुम गये नहीं
जीवन में कभी ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.