शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

ब्राह्मण की हत्या

जनता की माँग पर

माँ की आह पर... 

खेला जाने लगा है

एक और नाटक...

नहीं, 

नाटकों की शृंखला।

लिखी जा चुकी है पटकथा 

अन्यायपूर्ण न्याय की  

मिटाये जा रहे हैं

हत्या के साक्ष्य। 

राजा ने 

लोकतंत्र को 

आज फिर लटका दिया है

फाँसी पर 

आओ, हम सब उत्सव मनायें

अपने स्वाभिमान 

और अधिकारों की अर्थी सजायें

क्योंकि

मीलाॅर्ड ने झिड़क दिया 

डाँट कर चुप कर दिया  

साक्ष्य देती 

भोजपुर की स्त्रियों को  

...इस आश्वासन के साथ

कि बिना सुने साक्ष्य

वे कर देंगे ऐसा न्याय

जो नहीं होगा न्याय।

जानकर भी

देखकर भी

हम नहीं मानना चाहते 

कि हत्यायें 

हमारी नियति हो गई हैं 

न्यायालय के बाहर 

शरीर की 

और न्यायालय के भीतर 

सत्य की। 

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