रविवार, 26 जुलाई 2026

त्यागपत्र

 उसने त्यागपत्र दिया 

सत्य के लिए नहीं, असत्य के लिए

न्याय के लिए नहीं, अन्याय के लिए

और स्थापित कर दिया

कि "जयते सर्वदा असत्यमेव"

उसने बनाये 

अकीर्ति के नये सोपान

प्रोत्साहित करने 

असभ्यता और पतन को 

अश्लील गालियों और अराजकता को 

अन्याय और अत्याचार को

ताकि हो सके 

एक और विभाजन

धरती का

समाज का। 

विजयोन्माद में 

अश्लीलता नाच रही है

एल.जी.बी.टी. नाच रहे हैं

ढपली बजने लगी है

नारे गीत बन गये है

भारत तेरे टुकड़े होंगे...

फलाने को मुक्त करो...

ढिमाके को सम्मानित करो...

इसे पद्मश्री दो

उससे छीन लो।

हिंदू भगाओ देश बचाओ...

राजा हर्षित है

प्रजा मूर्छित है 

भारत 

हर दिन नया विश्वगुरु बनता है

चलो 

हम कहीं और चलें

गुरु तो हर कोई है

हम अच्छे छात्र ही बन जायें। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.