रूस-यूक्रेन युद्ध लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रूस-यूक्रेन युद्ध लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

शक्ति के लिये युद्ध

       नहीं माने, लड़ पड़े दोनों

          हमें यूक्रेन से सहानुभूति है पर हमें तटस्थ रहना होगा । साम्यवादी चीन साम्यवादी रूस के पक्ष में है और स्वयंभू चौधरी को पटकनी देने के लिये ताक में है । यदि अमेरिका यूक्रेन और रूस के बीच में कूदता है तो चीन भी सामने आयेगा और तब विश्वयुद्ध तय है । सैद्धांतिक रूप से हम रूस के विरोध में खड़े नहीं हो सकते, अन्यथा भारत की अलगाववादी शक्तियों का दुस्साहस बढ़ेगा ।

अमेरिका का इतिहास स्वार्थ, विश्वासघात और अवसरवादिता से भरा रहा है, वह किसी का भला नहीं  चाहता । शायद, यह युद्ध कुछ घंटों से अधिक नहीं चल सकेगा।

हर युद्ध का सबसे बड़ा ख़ामियाजा बच्चों और स्त्रियों को भोगना पड़ता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह विनाशक युद्ध यथाशीघ्र समाप्त हो ।

युद्ध और पत्रकारिता

युद्ध की एक्सक्ल्यूसिव तस्वीरें पहली बार आपके लिये सिर्फ़ हमारे चैनल पर । युद्ध की पल-पल की ख़बर सबसे पहले हमारे चैनल पर... “।

पीड़ादायक समाचार पढ़ने का तरीका भी ऐसा गोया क्रिकेट की कमेंण्ट्री ।

युद्ध की विनाशक घटनाओं को तमाशे की तरह परोसने वाली मीडिया से मुझे सख़्त ऐतराज है । विनाश के प्रति इतनी असंवेदनशीलता हमारे नैतिक और सांवेदनिक पतन की पराकाष्ठा है । यूक्रेन और रूस एक-दूसरी की तबाही के लिये आमने-सामने हैं, युद्ध की तबाही का काला धुआँ महँगाई बनकर पूरी दुनिया पर छाने लगा है और तुम बिल्कुल भी गम्भीर नहीं हो पा रहे हो? यह कैसी पत्रकारिता है?

समाचार कितना भी दुःखद और विनाशक क्यों न हो, उसे सनसनी बनाकर परोसने वाली पत्रकारिता क्यों नहीं प्रतिबंधित की जानी चाहिये? ऐसी पत्रकारिता से चौथे स्तम्भ का कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता बल्कि अराजकता और निरंकुशता को ही बल मिलता है ।

अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन

हल्ला है कि रूस ने यूक्रेन में प्रवेश करके अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है ।

जो शक्तिशाली होते हैं वे नियम बनाते हैं, जो दुस्साहसी होते हैं वे नियमों को तोड़ते हैं, और जो बहुत शक्तिशाली होते हैं वे नियमों को तोड़कर नये नियम बनाते हैं । नियमों को तोड़ना नियमों को चुनौती देना है । मानव सभ्यता का यही इतिहास रहा है ।

जब कोई अपराध करता है तो वह नियमों को चुनौती तो देता है किंतु कोई नया नियम नहीं बनाता । चुनौती की तीव्रता और उद्देश्य से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चुनौती छोटी है या बड़ी और उसकी मारक क्षमता कहाँ तक हो सकती है ।

परम्परा कुछ ऐसी बन गयी है कि चौथ वसूलने वाला गुण्डा कहलाता है और टैक्स वसूलने वाला राजा । अंतर केवल स्तर और क्षमता का है ।

पाकिस्तान ने बलूचिस्तान और कश्मीर घाटी पर कब्जा कर लिया, यह भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन था । तालिबान ने अफगानिस्तान की चुनी हुयी सरकार को भगा कर अपनी सरकार बना ली, यह भी नियमों का उल्लंघन था । मुस्लिम लीग ने ब्रिटिश इण्डिया के विभाजन का हठ किया और पाकिस्तान बना लिया, इसके बाद भी आज तक भारत का गला नहीं छोड़ा, इसे आप क्या कहेंगे?

बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का कब्ज़ा है, कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान का कब्ज़ा है, कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील पर चीन का कब्ज़ा है, तिब्बत पर चीन का कब्ज़ा है । जहाँ शक्ति है वहाँ सत्ता है, जहाँ दुर्बलता है वहाँ दासता और शोषण है । सामाजिक व्यवस्था के नाम पर बनाये जाने वाले नियम-कानून दुर्बलों पर शासन करने के हथियार बन जाते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता ।

माओज़ेदांग एक सिपाही से चीन का चेयरमैन बन जाता है, लेनिन और स्टालिन शक्ति के बल पर एक विराट राष्ट्र का निर्माण कर लेते हैं और आजीवन उसके राजा बने रहते हैं । भारत में अपराधियों की एक बड़ी संख्या विधायिका की अधिकारी हो जाती है । सब शक्ति का खेल है, उस शक्ति का जिसका एक रूप है हिंसा ।

उठो! जागो!! और आगे बढ़ो ...जब तक कि तुम राजा न हो जाओ । 

अपराधी और वसुदेव

शातिर और दबंग अपराधी अपनी तुलना वसुदेव से करने लगे हैं जिन्हें बिना किसी अपराध के कंस ने कारागार में डाल दिया था । वर्षों पहले किसी नेता ने ग़िरफ़्तार होने पर पूरी निर्लज्जता से कहा था कि कारागार तो उसके लिये पुण्यभूमि है । मैं इस अधोपतन और निर्लज्जता का सबसे बड़ा कारण उस मूर्ख प्रजा को मानता हूँ जो अपराधियों का गुणगान करने में स्वयं को धन्य मानती है और उन्हें अपना जनप्रतिनिधि चुनकर सदन में भेजती है ।

निर्लज्जता में नवाब मलिक ने तो लालू को भी पीछे छोड़ दिया है । हिरास्त में लिए जाते समय नवाब मलिक के चेहरे पर शर्म के स्थान पर ऐसा भाव था जैसे कि वह कोई किला फ़तह करके आया हो । हुंकार, धता और निरंकुशता की विजय के प्रति आश्वस्त नवाब मलिक की मुखमुद्रा लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करती हुयी सी नहीं लगती आपको! नेताओं का यह आचरण समाज में अपराधियों के हौसले बुलंद करने के लिये नैतिक सम्बल प्रदान करता है । यह पहली बार नहीं है, हमने ग़िरफ़्तार होने वाले सभी नेताओं को ग़िरफ़्तार होते समय परम प्रसन्न मुद्रा और विजयी भाव में ही देखा है ।