अब की वारिश
झमाझम बरसीं
पोर्नगालियाँ
नरों के मुख से
उससे भी अधिक
नारियों के मुख से
महामानव धन्य हुये
देश धन्य हुआ
सभ्यता धन्य हुयी
संस्कृति धन्य हुयी
भीगकर
गालियों की बरसात में।
अन्याय भी धन्य हुआ
जानकर
कि क्षमा कर दिया है
नानबायोलाॅजिकल भगवान ने
सभी गालीबाजों को
और लग जाना चाहते हैं उन सबके गले
हँसते हुये
किंतु...
छोड़ देना चाहते हैं
गोलियाँ खाने के लिए
राष्ट्रप्रेम के सच्चे दीवानों को
स्वतंत्र कर देना चाहते हैं
असुरों को
मारने के लिए पत्थर
हर उस व्यक्ति को
जो करेगा देश की
सच्ची सेवा
और न्याय की माँग।
अब की वारिश
उमस
ताप देने लगी है
ज्वालामुखी के
बहते लावे की तरह।
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