यह स्पष्टरूप से एक अयुद्धक अतिक्रमण है जो मोरक्को
द्वारा स्पेन में किया गया है । लगभग साठ हजार युवकों को मोरक्को की सीमा से स्पेन
के सेउटा में बलात् प्रवेश के लिये भेजा गया । इनमें से अधिकांश अपराधी हैं जिन्हें
मोरक्को सरकार ने स्पेन में घुसने के लिये जेल से मुक्त कर दिया । स्पेन इस षड्यंत्र
का पता लगाने में असफल रहा, उसकी पुलिस और सेना भी कुछ विशेष नहीं कर सकी । लगभग छिहत्तर उपद्रवी मारे
गये, कुछ घुसपैठियों को मोरक्को वापस जाने के लिए विवश कर दिया
गया फिर भी कुछ तो स्पेन में छिपने में सफल हो ही जायेंगे । यही मोरक्को की रणनीति
है ।
मोरक्को से स्पैन की दूरी
1335 किमी है । दोनों देशों की सीमाओं के बीच सनुद्र में मात्र तेरह किलोमीटर की दूरी
है । मोरक्को के पिनडेक से स्पेन के सेउटा पहुँचने के लिए मात्र पाँच किलोमीटर तैरना
पड़ता है । यही कारण है कि पंद्रहवी शताब्दी से उन्नीसवी शताब्दी तक पुर्तगाल, स्पेन,
फ्रांस और मोरक्को के बीच युद्ध होते रहे हैं । मोरक्को के लोग आज भी
स्पेन को यूरोप के प्रवेशद्वार के रूप में मानते हैं । कभी ईसाई बहुल रहा स्पेन मुस्लिम
बहुल होता जा रहा है। कई कारणों से मोरक्को के मुस्लिम स्पेन में बसना चाहते हैं ।
यह इस्लामिक विस्तार की भी एक रणनीति है कि अपने नागरिकों के सामने ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न
कर दो कि वे पलायन करके ईसाई, यहूदी, पारसी
और हिन्न्दू देशों में घुसपैठ के लिये बाध्य हो जायँ । इंग्लैंड, फ़्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने जिन मुसलमानों को शरण दी आज वे उनके ही अस्तित्व
के लिये संकट बन चुके हैं । यह शक्ति, षड्यंत्र और सत्ता का खेल
है जिसमें क्रूरता सर्वोपरि है । भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ।
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