कोई घर बसाकर कभी तुम भी देखो
बेसहारा किसी को न फिर कर सकोगे /
जां किसी की बचाकर कभी तुम भी देखो
ये खूं - ख़राबा न फिर कर सकोगे /
ये खूं - ख़राबा , ये दहशत के साए
कभी माँ से पूछो , कब उन्हें रास आये /
ग़ुल कोई खिलाकर कभी तुम भी देखो
बर्बाद कुछ भी न फिर कर सकोगे /
आओ मिल- बैठ कर नेक मंथन करें
चूक गए ग़र तो कुछ भी न फिर पा सकोगे /