गुरुवार, 3 सितंबर 2026

राजा सड़ा क्यों

यदा यदा हि धर्यस्य ग्लानिर्भवति भारत!

पढ़ा था 

गुना नहीं

रोटी जली क्यों...

घोड़ा अड़ा क्यों...

सुनी थी कहावतें

कभी गुनी नहीं

इसीलिए कभी सीखा नहीं

कि जो बात-बात पर अड़ता है 

वह कभी चलता नहीं

इसलिए फेरना आवश्यक है

रोटी, घोड़ा 

और राजा भी।  


हवायें ऐसी बहीं

कि बोझ बढ़ता गया 

सूचनाओं का

मस्तिष्क की तंत्रिकाओं पर

इतना... कि

वह नहीं रख सका संबंध

विवेक और हृदय से...

मन तो पहले ही उड़ा ले गई थीं

उष्ण

पछुआ हवायें।


तिवारी परिवार जी उठा है फिर

मरा नहीं कोई

नीलमणि तिवारी का बेटा

चाय बेचने लगा है

और बेटी

पकौड़े तलने लगी है

गर्व है योजनाकारों को 

कि देश की प्रति व्यक्ति आय 

बढ़ने लगी है।

अपराधी से सारथी बने लोग

देश के स्वामी बन गये हैं

और उनके नौनिहाल 

पढ़ने लगे हैं

सात समंदर पार

गोरों के देश में, 

लौट कर आएँगे जब

शिक्षा मंत्री बनेंगे भारत के 

और कहेंगे

बाबा साहब के दिए अधिकार से 

पढ़ सका बाहर जाकर

वरना तुमने तो पीने नहीं दिया पानी

पाँच हजार साल से।


बधाई हो!

नीलमणि तिवारी को भी 

मिल गई है नौकरी

दानापुर के सुलभ शौचालय में

सुदामा!

और कितनी प्रगति चाहिए तुम्हें!


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