रविवार, 21 जून 2026

भोजपुर माटी

 भारत भूषण तिवारी का खुला और साफ-सुथरा चरित्र एक शोध का विषय है।

पुलिस ने कई बार उन्हें सम्मानित किया, अपमानित भी किया, फिर एक दिन घेरकर हत्या कर दी। मुख्यमंत्री और मैथिली ठाकुर ने उन्हें अपराधी कहा, पुलिस ने पागल तो पिता ने विक्षिप्त भी कहा। भारत भूषण तिवारी जैसे लोगों को समझ पाना इतना सरल नहीं है  

वे कलियुग में जन्मे चंद सतजुगियों में से एक हैं। पुस्तकीय ज्ञान को जब जीवन का आदर्श बनाया जाता है तो पूरी दुनिया उसे ही शत्रु मानने लगती है, और सरकार आतंकवादी या राष्ट्रद्रोही मानकर हत्या कर देती है। चंद्रशेखरआजाद और भगत सिंह जैसे न जाने कितने आदर्शवादी युवक सत्ताओं की भेंट चढ़ गये, आगे भी चढ़ते रहेंगे। इन सबको पता है कि यथार्थ का धरातल बहुत ऊबड़-खाबड़ और पथरीला होता है फिर भी वे उसी पथ के दावेदार होते हैं। यह भी एक नशा है, सात्विकता का नशा, जिसके सामने  कालकूट का विष भी हल्का लगता है। भारत भूषण तिवारी कलयुग में सतयुगी बनकर आये, एक संदेश दिया और चलते बने। ऐसे चरित्रों को समझना हर किसी के लिए शक्य नहीं होता। मैं उस लड़के के लिए बहुत व्यथित हूँ.... और गौरवान्वित भी। 

बक्सर जिले के अधिवक्ताओं, जिनमें एक मुसलमान भी सम्मिलित हैं, को मेरा साधुवाद ! सोमवार को यह दल भारत भूषण  तिवारी के हत्यारों के विरुद्ध न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने जा रहा है। बिहार की धरती को नमन! बिहार के लोगों को नमन!        

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