शनिवार, 13 जून 2026

डीएनए की ऐसी तैसी

सुना है, मीलाॅर्ड ने हुक्म दिया है कि पेट में बच्चा किसी का भी हो, पर बच्चे का बाप वही माना जाएगा जो महिला का पति होगा।

मीलाॅर्ड जी को साष्टांग दंडवत! यही न्याय है और यही है असली वाला मानवाधिकार! पेट में बच्चे होंगे प्रेमी के, पालनकर्ता होगा जोरु का दासानुदास। अब पितृत्व को लेकर कोई विवाद नहीं होगा, न्यायालयों से भीड़ कम हो जायेगी, डीएनए औचित्यहीन हो जाएगा


यह व्यवस्था शानदार, प्रगतिवादी और सर्वहारा के लिए कल्याणकारी है। हजारों जातियों के स्थान पर पूरा देश केवल दो जातियों में वर्गीकृत किया जाएगा - एक जाति कोयल, दूसरी जाति कागा। एक जन्म देने वाला, दूसरा पालने वाला। गंगाराम कोयल, रामबरन कागा।

विवाहगीत में बड़ी-बूढ़ियाँ गायेंगी - "एक डाल पर कोयल बैठा, उसी डाल पर कागा... दाना लाने कोई गया, कोई बीज डाल के भागा... बोलो है ना! है ना है  ना...

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