शनिवार, 20 जून 2026

रक्तरंजित

भोजपुर के युवा लोकक्रांतिकारी भारत भूषण तिवारी अब नहीं हैं। बिहार सरकार और उसकी पुलिस ने उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने भीड़ के अनुरोध को ठुकराकर युवा क्रान्तिकारी की हत्या की, इसे पूरे देश ने देखा, सरकार ने नहीं। यह तो कुछ भी नहीं है, स्वतंत्र भारत की पुलिस ने बस्तर के महाराजा प्रवीरचंद्र भंज देव को उनके राजमहल में घुस कर गोलियों से छलनी कर दिया था। महाराजा निहत्थे थे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें केवल इसलिए मरवा दिया क्योंकि आदिवासी उन्हें अपना देवता मानते थे, और महाराजा उनके जल-जंगल-जमीन के अधिकार को बनाये रखने के पक्ष में थे। शासन-प्रशासन ने महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव को भी पागल और विक्षिप्त घोषित कर दिया था।अर्थात् जो पागल है, विक्षिप्त है उसे जीने का अधिकार नहीं है। जो चालाक और धूर्त है उसे सम्मान और प्रतिष्ठापूर्वक जीने का अधिकार है, ...यही लिखा है न संविधान में?

बिहार की जनता पुलिस से अनुरोध करती रही "गोली मत चलाइये"। पर पुलिस ने एक ऐसे युवक को मार डाला जिसे जनता ज़िंदा रहने देना चाहती थी। मदांध सत्ता ने भारत के लोकतंत्र को उस स्थिति में पहुँचा दिया है जहाँ लोक को अपनी भी चिंता करने का कोई आधिकार नहीं।

लोकनिर्माण के कार्यों में भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और झूठे आश्वासनों के विरुद्ध सरकार को ललकारने वाले भारत भूषण तिवारी को क्या पागल कहा जा सकता है? जनता जिसे अपना भगवान मानने लगी थी वह युवक सरकार को विक्षिप्त लगता है! क्या इस युवक की लड़ाई किसी को आतंकित करने के लिए है या भ्रष्टतंत्र को सुधर जाने की चेतावनी! सरकार तो आज तक सुभाषचंद्र बोस और सरदार भगतसिंह जैसों को भी आतंकवादी ही मानती है। 

....नहीं, यह देश सरकार की इस निरंकुशता को स्वीकार नहीं करेगा। हम सब भारत भूषण के लोकसुधार अभियान के संघर्ष को आगे ले जाएँगे। बिहार में निर्माणाधीन सेतु कब तक गिरते रहेंगे? बाढ़ में कब तक लोग बेघर होते रहेंगे?                              

पुलिस इनकाउंटर की जाँच की माँग होने लगी है, उससे क्या होगा????

एक और सच्चा क्रांतिकारी चला गया। चंद्रशेखर, भगतसिंह, सुभाष....और भारत भूषण तिवारी रोज नहीं जन्म लेते। बिहार में जो बिजली कड़की और उजाला हुआ वह रुकना नहीं चाहिए। दिख भी रहा है... यह रुकेगा नहीं, रुकना चाहिए भी नहीं।

हमें ही नहीं, पूरे देश को भारत भूषण तिवारी पर गर्व है। बिहार के भोजपुर की धरती पर गर्व है जहाँ पहले भी कुँवर वीरसिंह जैसे क्रांतिकारी जन्म लेते रहे हैं। वास्तव में यह लड़का जाते-जाते अपने नाम को सार्थक कर गया। 

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