तुमने हमें कहा
आदिवासीहम हो गये आदिवासी
तुमने हमें कहा
वंचित
हम हो गये वंचित
तुमने हमें कहा अविकसित
हम हो गये अविकसित
तुमने हमें कहा "जो-जो"
हम होते गये "वो-वो"।
पता नहीं
अभी आप हमें कहेंगे
और "क्या-क्या"
और हम होते रहेंगे
न जाने "क्या-क्या"
कभी तो छोड़ो हमें
स्वतंत्र
कि हो सकें हम "वो"
हम हैं
सचमुच में "जो"
कब तक आप बनाते रहेंगे हमें
सत्ता की सीढ़ियाँ
रौंदते हुये हमें
अपने विचारों की पादुकाओं से!
कब तक?
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