पिछले तीन महीनों में मधुमेही के रक्त में ग्लूकोज की औसत स्थिति जानने के लिए किये जाने वाले परीक्षण के मानदंड अब पहले वाले नहीं रहे। यह पहले से डेढ़ अंक बढ़त की छूट देता है, यानी साढ़े छह से साढ़े सात प्रतिशत तक अब कोई डायबिटीज नहीं। आयु के आधार पर इसमें और भी वैरिएशन्स हैं जो यूएसए के शोधकर्ताओं ने प्रकाशित किये हैं।
मोतीहारी वाले मिसिर जी मानते हैं कि-"महाकलियुग की इस महाबेला में किसी भी देश में, किसी भी विषय पर किए गये शोध के निष्कर्ष विश्वसनीय नहीं माने जा सकते।"
राखी गढ़ी से लेकर दुनिया भर के स्थानीय लोकसमूहों के डीएनए जेनोम्स को ब्राह्मणों की देह में खोजने को लेकर किये जा रहे शोध भी विश्वसनीय हैं क्या! जब किसी सामान्य सीबीसी की जाँच ही विश्वसनीय नहीं हो पाती तो डीएनए जेनोम्स में किसी को कल्प्रिट मान कर की जाने वाली पूर्वाग्रही जाँच कितनी विश्वसनीय हो सकती है!
अमेरिकी शोधकर्ताओं के निष्कर्षों पर विभिन्न देशों के स्थानीय परिप्रेक्ष्य में विचार किया जाना अपेक्षित है।
१. कोई भी शोध उद्योगपतियों और सरकार की मिलीभगत से आंशिक या पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
२. वैज्ञानिक अपने प्रायोजकों और सरकारों के दबाव में कार्य करते हैं, जिससे वही परिणाम निकाले जा सकते हैं जो उद्योग के लिए लाभकारी हों न कि आमजनता के लिए!
३. किसी भी महाद्वीप, देश और उसके विभिन्न विस्तारित क्षेत्रों की परिस्थितियाँ, वहाँ के निवासियों की एनाटाॅमिकल और फिजियोलाॅजिकल स्थितियों और उसमें होने वाली पैथोलाॅजिकल प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करती हैं जिसके परिणाम स्वरूप बहुत से वैरिएशन्स सामने आते हैं। इनका सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता। दो सगे भाइयों में से एक सैनिक है तो उसके रक्तचाप में दूसरे भाई की अपेक्षा भिन्नता का स्तर अधिक होगा।
४. फ्रांस और उसके ठीक पड़ोसी जर्मनी की भोजनशैली में भिन्नता के कारण वहाँ के लोगों में हृदयरोग की प्रायिकतायें अचंभित करती हैं। उन लोगों में ही ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन का प्रतिशत एक समान संकेत और सूचनाएँ नहीं दे सकता।
५. WHO, CHINA और USA बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। कोरोना काल में दुनिया ने सीख लिया कि इन पर भरोसा करना अपने विनाश को आमंत्रित करना है।
६. बेचारा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस सर्वाइकल कैंसर का एक बहुत छोटा सा घटक है जिसको इतना बड़ा कल्प्रिट बनाकर जनरलाइज कर दिया गया। सर्वाइकल कैंसर के लिए वही एक मात्र उत्तरदायी नहीं है जिसे टीका लगाकर इरेडीकेट कर दिया जाएगा, गोया राजा की छाती पर बैठी मक्खी को दंड देने के लिए तलवार का नहीं अपितु सीधे न्यूक्लियर बम का प्रहार।
७. तऽ रउवा लो ...चिंता झन करीं, मस्त रहीं, सुअस्थ रहीं, जब तक आपन देहिंया से कवनो एडभर्स संकेत नऽई खे मिलत तब तक कवनो टेस्ट-फेस्ट के झंझट मऽ मत परीं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.