सोमवार, 14 सितंबर 2026

कालनेमि कभी नहीं मरता

प्रतिकूल स्थितियों में कालनेमि छिप जाते हैं, मरते नहीं। यही प्रवृत्ति माइक्रोब्स की भी होती है। हम सदा माइक्रोब्स से घिरे रहते हैं। इनकी सही पहचान या इन्हें पहचानने की भूल ही हमारा भविष्य तय करती है। 

भाजपा अपने जन्म से ही श्रापित है, जब सत्ता के लिए जनसंघ को नेपथ्य में धकेलकर कांग्रेसीकरण के सिद्धांत के साथ कुछ चालाक लोगों ने हिंदुओं पर मोहिनी डालने की कमान सँभाली थी। हिंदूराष्ट्र का सपना दिखाकर भाजपा ने हिंदुओं के साथ विश्वासघात का नया कीर्तिमान स्थापित करने में सफलता पाई है। देश के बुद्धिजीवी भी भाजपा के भँवरजाल में फँसते गये और अपने सर्वनाश को आमंत्रित करते रहे। पर अब भलीभाँति घायल होने के बाद हिंदुओं का नीरक्षीर विवेक जाग्रत हो गया है और भाजपा एवं कांग्रेस मुक्त भारत का रुझान स्पष्ट होने लगा है।

स्मरण कीजिए, आपातकाल के बाद चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध जो भी खड़ा हुआ वही जीत गया। तब सुपात्र और कुपात्र का भेद समाप्त हो गया था। माना कि वह विरोध और घृणा के चरम का परिणाम था पर उसका परिणाम भी ठीक अगले चुनाव में दिखाई पड़ गया। इंदिरा ने वापस सत्ता सँभाली। अब वैसा ही इतिहास किंचित और परिशोधन के साथ दोहराए जाने के लिए तैयार है। न कांग्रेस, न भाजपा, इस बार नया प्रयोग भारतीय मतदाता की परिपक्वता का परिचय देने की दिशा में प्रवृत्त हो चुका है जो नया विकल्प बनेगा। 

जय हिंदूराष्ट्र !

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