बुधवार, 9 सितंबर 2026

छुआछूत

निर्धन सदा सामाजिक दुर्बल

ऐश्वर्यशाली सदा सबल

सबल में प्रभुता 

निर्बल में दीनता

यही है 

लोकव्यवहार का कठोर धरातल

जो किसी आदर्श से 

नहीं होता भयभीत

दिखाता है ठेंगा

हर युग के सुदामा को।


तुम 

होकर भी सबल

करते रहे ईर्ष्या

और खोदते रहे खाइयाँ

अपने और सुदामा के बीच।

सुदामा बचता रहा

दूर भागता रहा

तुम्हारे अत्याचारों से

तुम्हारी परछाई से

तुमसे 

तुमने इसे छुआछूत कहा 

जातीय घृणा कहा 

और फिर मढ़ दिया 

एक और आरोप।

क्या सचमुच जातीय आरोप

या तुम्हारे अत्याचारों से बचने का 

एकमात्र 

विवश उपाय भर !

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