बिना कोई प्रमाण
मानना ही होगा तुम्हेंकि "भगवान ने नहीं
पंडितों ने बनाईं जातियाँ"
और तोड़ दिया समाज
खोद डाली खाइयाँ
इसलिए तोड़ देंगे हम
बंधन जात-पात के
बनवाकर प्रमाणपत्र
दलित, अतिदलित, महादलित
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति
और पिछड़े होने का
अपना, अपने बच्चों का
कि वे आज जो हैं
वही बने रहना चाहते हैं
अनंतकाल तक
लेते रहेंगे आरक्षण
कोसते रहेंगे पंडितों को
देते रहेंगे गालियाँ
मारते रहेंगे चार जूते
प्रतिदिन
तिलक तराजू और तलवार को
क्योंकि भगवान ने नहीं
पंडितों ने बनाईं हैं जातियाँ।
हम लिपिबद्ध करेंगे यह इतिहास
कि पंडितों ने बनाईं हैं जातियाँ
करके जातिगणना
लिख डालेंगे ग्रंथ
और हो जाएगें अमर
बनकर आरक्षित और उत्पीड़ित
करते रहेंगे उत्पीड़न
तिलक, तराजू और तलवार का।
हम दलित हैं
विश्वविद्यालय के शोधार्थी हैं
इसलिए
हम साफ करायेंगे अपने जूते
ब्राह्मणों से
और करेंगे विवाह
उनकी बेटियों से
भगा देंगे ब्राह्मणों को
भारत से बाहर
क्योंकि हम
दलित, शोषित और उत्पीड़ित हैं।
इतिहास
परिभाषित करेगा हमें
धरती के सर्वाधिक
"डरे हुये, शोषित लोग"।
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