गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

विरोध की अंतरधाराएँ- २

बौद्धभिक्खु सुमित रत्न उवाच-  

"१.सनातन शब्द बौद्ध धर्म का है जिसे हिंदुओं ने ले लिया। बौद्ध ही सनातन है। हिंदू धर्म तो यूरेशिया से आये विदेशी आक्रमणकारियों का धर्म है। २. भारत में सभी हिंदूमंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाये गये हैं। ३. हमारे पास ऐसे ८४ हजार मंदिरों के प्रमाण हैं जो बौद्धमठों को तोड़कर बनाये गये हैं। ४. अयोध्या के राममंदिर और तिरुपतिमंदिर सहित  भारत के सभी प्रमुख मंदिर बौद्धमठ थे जिनपर मनुवादियों ने अधिकार कर लिया।"

बौद्ध और भीमभक्त यह प्रचारित और स्थापित करने में सफल हुये हैं कि धर्म और सभ्यता का प्रारम्भ बुद्धयुग से ही हुआ है और भीमराव आंबेडकर ने भारत के मूलनिवासियों की महिलाओं को स्तन ढकने व पुरुषों को शिक्षा का अधिकार दिया। जब उच्चशिक्षित और शासन के उच्चपदाधिकारी लोग आमजनता के सामने दहाड़ते हुये ऐसे निराधार वक्तव्य देते हैं तो सुनने वालों के मन में तर्क-वितर्क का कोई स्थान नहीं रह जाता। वे वही मानते हैं जो उन्हें बताया जाता है। इन छद्म विद्वानों ने बौद्धरामायण जैसी पुस्तकें लिखकर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ बलात्कार ही नहीं किया है प्रत्युत भारत विभाजन की एक और आधारशिला रख दी है। 

सुमितरत्न ही नहीं, बहुत से उच्चशिक्षित लोग भी यही मानते और प्रचारित करते हैं कि हिन्दू लोग यूरेशिया से आये अत्याचारी विदेशी आक्रमणकारी हैं । ऐसे लोगों में जज, कलेक्टर, कमिश्नर, डाॅक्टर, आईपीएस अधिकारी और मंत्री लोग भी सम्मिलित हैं। 

इन लोगों ने अपने विचारों की प्रामाणिकता के लिए मनगढ़ंत अत्याचारों, मिथ्या इतिहास और निराधार   किस्सों को गढ़कर बड़ी-बड़ी पुस्तकों को प्रकाशित किया है। 

यह विडंबना है कि उनका गढ़ा शतप्रतिशत झूठ स्थापित-मंडित होता जा रहा है और हम न तो उसका सशक्त खंडन कर पा रहे हैं और न भारतीय सभ्यता के सत्य को सामने ला पा हे हैं। हम इतने असमर्थ और निर्बल क्यों हैं?खंडन-मंडन के लिए हमारे पास कोई सुदृढ़ और परिपक्व योजना क्यों नहीं है? सावधान! हिन्दूविरोध अब केवल विचार तक ही सीमित नहीं रहा, हिंसक घटनाओं में रूपांतरित हो चुका है।

क्रमशः... 

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