गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

विरोध की अंतरधाराएँ- ३

(वैज्ञानिक की निष्ठा)

ब्राह्मणीय चरित्र और निष्ठा पर वामसेफियों के निरंतर प्रहारों के बीच एक युवा ब्राह्मण ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। ब्राह्मणों की ऐसी दाधीचि परंपरा हमारे लिए गर्व का विषय है। 

मानव मस्तिष्क पर यांत्रिकीय नियंत्रण के गंभीर दुष्परिणामों की आशंकाओं के कारण विश्वविख्यात ए.आई. प्रतिष्ठान एंथ्रोपिक के वैज्ञानिक मृणांक शर्मा त्यागपत्र दे चुके हैं और अब वे कविताएँ लिखेंगे। 

युवा वैज्ञानिक मृणांक आॅक्सफोर्ड विवि से मशीन लर्निंग में पीएच.डी. करने के बाद एंथ्रोपिक में सेफगार्ड टीम के प्रमुख नियुक्त हुये थे। मानव मस्तिष्क पर मशीन का नियंत्रण बौद्धिक जगत में चिंतन और मंथन का विषय रहा है। मृणांक ने मानव मस्तिष्क की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता पर मशीनी नियंत्रण के बढ़ते प्रभागों को नैतिक मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में देखा और एंथ्रोपिक को राम-राम कहकर साहित्य की ओर मुड़ गये। मृणांक शर्मा के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में वामन मेश्राम और चंद्रशेखर रावण जैसे वामसेफियों के अखण्डमौन पर भीमवादियों को विचार करना चाहिए जो यह दुष्प्रचार करते नहीं थकते कि ब्राह्मणों में नैतिकता, निष्ठा और चरित्र का पूरी तरह अभाव होता है।

क्रमशः...

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