गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

शुद्धिकरण

बड़ी उदारता से

स्वीकार किया था पंक
धँसते चले गये जिसमें
हम सब
नहीं भेद सके
Friedrich Max Muller के
चक्रव्यूह को।
करते रहे पोषित पल्लवित
उसके रोपित वृक्ष को
जिसमें लगते रहे
विषाक्त फल
Aaryan invesion theory की शाखाओं में।
राजा और मंत्री
संरक्षित करते रहे अयोग्यता
दुत्कारते रहे योग्यता
बनाते रहे
जातियाँ, उपजातियाँ
खोदते रहे खाइयाँ
गहरी ...और भी गहरी
करते रहे आरोपित
ब्राह्मणों को
अपने हर अपराध के लिए।
बढ़ता ही जा रहा है
संताप
प्रारंभ हो गया है
क्वथन
दूषित जल में
अब करना ही होगा
पलायन
शुद्धजल को
होकर ऊर्ध्वमुखी
त्यागकर
बहुत भारी पड़ चुका
दूषित पंक।
अब नहीं रुकेगा भारत
हुये बिना
पंकमुक्त ।

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