रविवार, 23 अगस्त 2026

वैक्सीन, वायरस और व्यापार

आग पर रोटी पकती है तो क्या सूरज पर पका लें! माइक्रोब्स रोग उत्पन्न करते हैं और इम्युनिटी भी, तो क्या उनका स्वागत करें और उन्हें अपने शरीर में निर्बाध प्रवेश करने दें? 

माइक्रोब्स और शरीर के बीच में आती है हाइजीन की अवधारणा और म्यूटेशन एवं वैरिएन्ट्स के रहस्य। 

मैं अपने छात्र जीवन से ही वैक्सीनेशन के विरोध में खड़ा होता रहा, लोग उपहास करते रहे, शिक्षक भी और सहपाठी भी, पर मैं खड़ा रहा। और अब जबकि anti HIV वैक्सीन की चर्चा हो रही है तो एंटी कोरोना वैक्सीन का भूत भी एक बार पुनः झाँकने लगा है। न्यू वर्ल्ड आॅर्डर के लिए जाॅर्ज सोरोस से लेकर मोदी तक पुष्पमाला लेकर खड़े हैं। उद्योगपति हर्षित हैं... बकरे स्वयं आगे आ रहे हैं कटने के लिए। न्यू वर्ल्ड आॅर्डर के लिए और क्या चाहिए!

हम कुछ नहीं कहेंगे, जनसंख्या भी तो कम होनी चाहिए न! प्रकृति संतुलन करती है, यहाँ अतिज्ञानी लोग प्रकृति का अधिकार स्वयं ले चुके हैं। एपस्टीन एक बार पुनः चर्चा में है, ...कि कोविड पूर्वनियोजित था, WHO की भूमिका भी पूर्वनियोजित थी। सबका साथ था...स्वास्थ्य के विरुद्ध विष बाँट कर अपने विकास का। लाॅकडाउन हुआ, थाली बजी, वैक्सीन लगा, ...और अब हो रहा है हृदयाघात, आकालमृत्यु। योजना सफल हो रही है। जनसंख्या कम हो रही है, उद्योग विस्तारित हो रहे हैं। कल क्या होने वाला है? ....छोड़िये, बाद में सोचेंगे, अभी तो अपनी बच्चियों को एंटीकैंसर वैक्सीन (Anti HIV) लगवाना है... ताकि इस बार उनकी देह में कैंसर की फसल अच्छी हो।

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.