वे मिटा रहे हैं
पहचान के चिन्ह
एक-एक कर,
नाम
वेश-भूषा
परंपरा
भाषा
संस्कार
और सभ्यता...
ताकि आसान हो सके
हत्या
एक देश की।
सभ्यतायें
इस तरह भी मार दी जाती हैं
भाषायें
इस तरह भी मार दी जाती हैं
और जीत लिया जाता है
एक युद्ध
बिना लड़े कोई युद्ध।
युद्ध लड़ने में
अनिश्चित है हार-जीत
पहचान समाप्त कर देने से
निश्चित हो जाता है सब कुछ
पहले से ही।
तिब्बत को तो मार रहा है
चीन
ब्रिटेन को मार रहा है
इस्लाम
किंतु भारत को मार रहा है
भारत ही
सुना तुमने!
भारत को मार रहा है भारत ही।
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