गुरुवार, 20 अगस्त 2026

गोमाता

राम भी वह

माधव भी वह

पर 

किंचित भी राम नहीं

किंचित भी माधव नहीं

संघ के चिंतन ने

राम तो छीने ही

छीन लिए माधव भी


गोमाता और धर्म से 

पृथक करता जो

जीवनशैली को

पूछते हैं कौशलेश

पूछते हैं वासुदेव

धर्म से पृथक

अस्तित्व

जीवनशैली का

बताओ तो राम माधव!

ना-ना-ना

बुड़बक न बना पाओगे

उत्तर तो देना ही होगा

किसी न किसी को

आज

प्रत्याशी को

या कल

मतदाता को

सोच लो जी भर

कौन दे उत्तर!

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टिप्पणियाँ हैं तो विमर्श है ...विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग प्रशस्त है .........परिमार्जन है तो उत्कृष्टता है .....और इसी में तो लेखन की सार्थकता है.