राम भी वह
माधव भी वह
पर
किंचित भी राम नहीं
किंचित भी माधव नहीं
संघ के चिंतन ने
राम तो छीने ही
छीन लिए माधव भी
गोमाता और धर्म से
पृथक करता जो
जीवनशैली को
पूछते हैं कौशलेश
पूछते हैं वासुदेव
धर्म से पृथक
अस्तित्व
जीवनशैली का
बताओ तो राम माधव!
ना-ना-ना
बुड़बक न बना पाओगे
उत्तर तो देना ही होगा
किसी न किसी को
आज
प्रत्याशी को
या कल
मतदाता को
सोच लो जी भर
कौन दे उत्तर!
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