सोमवार, 12 अक्तूबर 2020

संविधान की शपथ लेकर संविधान पर वार...

आतंकवादी बनकर भारत पर हमला करने के कई ख़तरे हैं लेकिन बिना किसी ख़तरे के ...बल्कि भारत की शाही सुविधाओं का उपभोग करते हुये भारत के विरुद्ध षड्यंत्र करने और भारतीय संविधान से विश्वासघात करने का एक शाही तरीका भी कुछ लोगों ने ईज़ाद कर लिया है । यह एक क़माल का तरीका है जिसमें शिकार ख़ुद अपने शिकारी की रक्षा करने के लिए विवश होता है और बारम्बार शिकार होता रहता है । इस तरीके को स्तेमाल करने के लिए किसी भी तरह भारत की संसद में सदस्य की हैसियत पाना होता है या महज़ एक अलगाववादी नेता बनना होता है । भारतीय संसद का सदस्य बनने के बाद भारतीयों की कमाई से शाही ज़िंदगी जीते हुये और भारत सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी सुरक्षा सुविधाओं का उपभोग करते हुये पाकिस्तान जाकर भारत की सरकार को गिराने के लिए निवेदन करने या कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए चीन की मदद लेने की इच्छा प्रकट की जा सकती है ।

एक सांसद रहते हुये डॉक्टर फ़ारुख़ अब्दुल्ला का चरित्र हमेशा ही भारत विरोधी रहा है । यह आदमी भारत की संसद में भारत के एक संसदीय क्षेत्र का सम्माननीय प्रतिनिधि है किंतु भारत की संसद द्वारा लायी गयी एक व्यवस्था के विरुद्ध चीन का सहयोग लेने की बात करता है और जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करके एक अलग रियासत बनाने के लिए पाँच अगस्त 2020 को लंदन या वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन में सम्मिलित न हो पाने से दुःखी होता है । यह आदमी भारत की संसद का सदस्य है किंतु केवल अपनी मज़लूम क़ौम के लिए चिंतित होने की बात कहता है भारत के लिए नहीं । यह आदमी डॉक्टर है और उसका मानना है कि उसकी “मज़लूम क़ौम के लोगों ने अल्लाह को छोड़कर शैतान को पकड़ लिया है”, उन लोगों का “अल्लाह में पक्का ईमान नहीं है” । यह आदमी “अल्लाह का दामन थामकर” अपनी “क़ौम को मुश्किल से निकालना” चाहता है । भारत का नमक खाने वाले इस आदमी का ख़याल है कि जम्मू-कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने की नयी व्यवस्था से उसकी मज़लूम क़ौम मुश्किल में आ गयी है ।      

और सबसे क़माल की बात तो यह है कि डॉक्टर फ़ारुख़ अब्दुल्ला नामक ज़हरीले आदमी के भारतविरोधी कृत्यों को देशद्रोह मानना एक ग़ुस्ताख़ी है,यूँ वह बात अलग है कि पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और पी.ओ.के. के वज़ीर के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला दर्ज़ करवा देना वहाँ की सियासत के लिए बहुत मामूली सी बात है ।

          ...तो मैं ख़ुशी-ख़ुशी यह ग़ुस्ताख़ी करना चाहता हूँ और भारत के एक ज़िम्मेदार नागरिक की हैसियत से डॉक्टर फ़ारुख़ अब्दुल्ला नामक आदमी पर सांसद रहते हुये भारत के विरुद्ध चीन की मदद लेने का मंसूबा रखने के ज़ुर्म में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज़ करने की माँग़ करता हूँ ।

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