बुधवार, 23 सितंबर 2026

कब तक

आई आई टी मुंबई है
एक खेत 
जिसमें बोता है बीज
एक समर्पित वैज्ञानिक
एक समर्पित शिक्षक
जिसे बाध्य कर देती है 
तुम्हारी कुव्यवस्था
तुम्हारी कुराजकता
पलायन के लिए
कहीं दूर।

दादी ने बताया था
राजहठ से
रूठ जाया करती है
खेत की मिट्टी
बीज
और मेघ भी।
ग्रहण लग जाता है
खेत की उर्वरता को
अब कोई बीज 
नहीं उगेगा वहाँ
पहले की तरह
यह सब जानकर भी 
हठ नहीं छोड़ना चाहते तुम!

खींचकर सारा सत्व
हर बायोलाॅजिकल से
शनैः शनैः बनाते जा रहे हो तुम 
सब कुछ 
नानबायोलाॅजिकल 
क्या करोगे
इतने बंजर खेतों का! 
अचंभित है विश्व
इतनी निर्लज्जता ओढ़कर
कैसे जी लेते हो तुम!
सूर्य को ओढ़ाकर 
बादलों के लबादे
कब तक बंदी रखोगे तुम!

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