मंगलवार, 29 सितंबर 2026

सुना तुमने

वह खड़ा था

अकड़ता हुआ 

अड़ा था

हर किसी की राह में

फिर एक दिन पसर गया

भरभराकर ढह गया

तुमने कहा

भूस्खलन हुआ

हमने कहा

अहंकार का अंत हुआ

सुना तुमने!

वर्जित है 

अति 

सर्वत्र ।

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