अँगुली उठा सकते हैं
एक मीलाॅर्ड
दूसरे मीलाॅर्ड पर
पर इस अधिकार पर
नहीं है कोई अधिकार
जनता का ।
कटुतम आलोचना कर सकते हैं
एक माननीय
दूसरे माननीय की
पर इस अधिकार पर भी
नहीं है कोई अधिकार
जनता का ।
पोर्न गालियों की बौछार से
कर सकता है सराबोर
एक स्वेच्छाचारी
दूसरे स्वेच्छाचारी को
और इस अधिकार पर भी
नहीं है कोई आधिकार
जनता का
क्योंकि जनता सब जानती है
और जो सब जानता है
वह बना रहता है
आँख की किरकिरी
हर किसी की
लोकतंत्र का यही धरातलीय सत्य
अपराध होता है
जब-जब
बनता है सम्राट
कोई नितांत बायोलाॅजिकल
अचानक नानबायोलाॅजिकल।
अधिकार
नहीं होते समान
होते हैं
तेरे-मेरे
अलग-अलग
बस, लंबी होनी चाहिए
लाठी।