बुधवार, 4 नवंबर 2026

In my own ways

कश्मीर से त्रिपुरा तक़ 

असुरक्षित है

पुलिस

सेना

और आम नागरिक।

राजा

आत्ममुग्ध है 

कि उसने दबोच लिया है

राजसिंहासन

फिर क्यों न व्याप्त हो यहाँ 

निरंकुशता और अराजकता।

बढ़ते ही जा रहे हैं

पुलिस और सेना पर 

अपराधियों के हिंसक आक्रमण

तथापि

वे इसे सुशासन कहते हैं और 

पुरस्कृत करते हैं

स्वयं को

अपनी श्रेष्ठतम 

शासन व्यवस्था के लिए।

इधर

आत्ममुग्धता में निमज्जित

हमारे अतिबुद्धिजीवी गाँव में

स्वयं को 

सभ्य

सुसंस्कृत 

और आभिजात्य मानने वाले लोग

सुन रहे हैं संगीत

पी रहे हैं मदिरा

खा रहे हैं कड़कनाथ

कहते हुए-

ओह! डाॅक्टर मिश्रा!

प्लीज़!

नो वर्ल्डली अफ़ेयर्स,

आय डोन्ट लाइक पाॅलिटिक्स

लेट मी इंज्वाय माय लाइफ

इन माय आॅन वेज़।


इस विशाल भीड़ में 

सुन पा रहे हैं 

मात्र कुछ लोग 

देश को

कराहते हुए

गहन पीड़ा से,

जहाँ सुरक्षित नहीं 

सेना

वैज्ञानिक

और प्रतिभा

वहाँ कैसे हो सकती है सुरक्षित

देश की सीमा!

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